झारखंड

कोयलांचल में फुटओवर ब्रिज, सड़क और रेल सुविधाओं का इंतजार

Kavita2
10 July 2026 1:55 PM IST
कोयलांचल में फुटओवर ब्रिज, सड़क और रेल सुविधाओं का इंतजार
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Jharkhand झारखण्ड : चुनावी सभाओं में किए गए विकास के बड़े-बड़े वादों के बावजूद झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र के लोगों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। चुनाव के समय जिन परियोजनाओं को क्षेत्र के विकास की आधारशिला बताया गया था, वे अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी हैं। इसका असर आम जनता के दैनिक जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान किए गए आश्वासनों पर अब तक अमल नहीं होने से जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

कांके विधानसभा क्षेत्र के विधायक और रांची लोकसभा क्षेत्र के सांसद ने चुनाव प्रचार के दौरान राय रेलवे स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज (एफओबी) के निर्माण, राय-बचरा स्थित स्वामीनगर चौक से राय आरसीएम साइडिंग तक पक्की सड़क बनाने तथा क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार जैसे कई महत्वपूर्ण वादे किए थे। इन घोषणाओं से लोगों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी इन योजनाओं पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।

फुटओवर ब्रिज का इंतजार

राय रेलवे स्टेशन क्षेत्र के लोगों के लिए फुटओवर ब्रिज सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है। यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए पटरियां पार करनी पड़ती हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष यह मांग रखी गई, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। लोगों का मानना है कि यदि फुटओवर ब्रिज बन जाए तो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और स्टेशन पर आवागमन भी सुगम हो जाएगा।

सड़क निर्माण का वादा भी अधूरा

राय-बचरा स्थित स्वामीनगर चौक से राय आरसीएम साइडिंग तक पक्की सड़क बनाने की घोषणा भी चुनावी वादों का अहम हिस्सा थी। यह मार्ग स्थानीय लोगों, कोयला उद्योग से जुड़े कर्मचारियों और भारी वाहनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

वर्तमान में सड़क की खराब स्थिति के कारण लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन जाती है, जबकि गर्मी में धूल के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू नहीं होने से क्षेत्र का विकास भी प्रभावित हो रहा है।

रेल सुविधाओं में सुधार की उम्मीद अधूरी

चुनाव के दौरान क्षेत्र में रेल सेवाओं को बेहतर बनाने का भी वादा किया गया था। स्थानीय लोगों की मांग है कि राय रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों का ठहराव हो, यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जाए और स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जाए।

हालांकि अब तक इन मांगों पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। यात्रियों का कहना है कि सीमित रेल सुविधाओं के कारण उन्हें दूसरे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।

जनप्रतिनिधियों से बढ़ी जवाबदेही की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि चुनाव समाप्त होने के बाद विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई और कई घोषणाएं केवल आश्वासन बनकर रह गईं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्र के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

व्यापार और रोजगार भी प्रभावित

अधूरी सड़क और कमजोर बुनियादी ढांचे का असर स्थानीय व्यापार और रोजगार पर भी पड़ रहा है। क्षेत्र के दुकानदारों और व्यवसायियों का कहना है कि खराब सड़क और परिवहन सुविधाओं की कमी से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। वहीं, रोजाना यात्रा करने वाले कर्मचारियों और छात्रों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों से लंबित परियोजनाओं पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटओवर ब्रिज, सड़क निर्माण और रेल सुविधाओं का विस्तार केवल विकास की योजनाएं नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़े मुद्दे हैं।

सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने पर भी विचार किया जाएगा।

लोगों की नजर अब अमल पर

कोयलांचल के लोग अब नए वादों से अधिक पुराने वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब घोषणाएं धरातल पर उतरें और आम नागरिकों को उसका लाभ मिले।

फिलहाल राय रेलवे स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज, सड़क निर्माण और रेल सुविधाओं के विस्तार जैसी परियोजनाएं अधूरी हैं। ऐसे में क्षेत्र की जनता की नजर अब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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