
रांची। भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत देशभर में मतदाताओं को गणना फॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पहचान और पते का सत्यापन करना तथा पात्र मतदाताओं को सूची में सही तरीके से दर्ज करना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म भरते समय किसी भी तरह की गलती भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए इसे पूरी सावधानी से भरना जरूरी है।
गणना फॉर्म में सबसे ऊपर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) का नाम, संपर्क नंबर, मतदान केंद्र और क्यूआर कोड दिया गया होता है, जिसे बीएलओ द्वारा भरा जाता है। इसके बाद मतदाता को अपना नाम, विधानसभा क्षेत्र, भाग संख्या, क्रम संख्या, जन्म तिथि, लिंग, मोबाइल नंबर और पूरा वर्तमान पता भरना होता है। यदि मतदाता पहले से वोटर लिस्ट में दर्ज है, तो पुराने और वर्तमान विवरण का सही मिलान करना आवश्यक है।
फॉर्म में पिता, माता या पति/पत्नी का नाम, जन्म स्थान और परिवार के अन्य मतदाताओं की जानकारी भी मांगी जाती है। सभी विवरण स्पष्ट और सही तरीके से भरना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की गलत या अधूरी जानकारी देने से फॉर्म अस्वीकार भी किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग ने आयु के आधार पर दस्तावेजों के नियम भी तय किए हैं। 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि और जन्म स्थान का प्रमाण देना होगा। वहीं, 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को अपने साथ माता या पिता का प्रमाण भी देना होगा। इसके अलावा 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को स्वयं के साथ माता और पिता दोनों के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, सरकारी सेवा रिकॉर्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र या निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद मतदाता को हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगाना होगा और सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतियां बीएलओ को सौंपनी होंगी। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे सभी जानकारी सही और पूर्ण रूप से भरें ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। इसके साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मतदाता को फॉर्म की दो प्रतियां दी जा रही हैं। एक प्रति बीएलओ को जमा करनी होती है, जबकि दूसरी प्रति मतदाता को पावती के रूप में अपने पास सुरक्षित रखनी चाहिए।
हालांकि कई जगह यह देखा गया है कि मतदाता दोनों प्रतियां बीएलओ को ही दे रहे हैं, जो गलत है। पावती प्रति अपने पास रखना जरूरी है, क्योंकि यह भविष्य में सत्यापन और रिकॉर्ड के लिए उपयोगी होती है। कुल मिलाकर, निर्वाचन आयोग की यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए की जा रही है। इसलिए हर मतदाता को चाहिए कि वह फॉर्म भरते समय पूरी सावधानी बरते और सभी नियमों का पालन करे।





