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RSS कार्यक्रम में वी भगय्या का आह्वान, 'युवा केवल नौकरी नहीं, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी समझें'
JHARKHAND: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी वी. भगय्या ने युवाओं से केवल व्यक्तिगत करियर और आर्थिक सफलता तक सीमित न रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उन्हें अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
RSS के 'युवा संवाद' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वी. भगय्या ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है। यदि युवा अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करेंगे, तो देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
युवाओं से राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील
अपने संबोधन में वी. भगय्या ने कहा कि आज के समय में अधिकांश युवा बेहतर शिक्षा, नौकरी और करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो स्वाभाविक और आवश्यक है। लेकिन इसके साथ ही समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक का दायित्व केवल अपने परिवार और पेशे तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी उसकी भूमिका होती है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
वी. भगय्या ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और यह जनसंख्या देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे—
सामाजिक सेवा के कार्यों में भाग लें।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवा करें।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करें।
संविधान और कानून का सम्मान करते हुए जिम्मेदार नागरिक बनें।
चरित्र निर्माण पर दिया जोर
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और नैतिक मूल्यों से तय होती है।
उन्होंने युवाओं से ईमानदारी, अनुशासन, सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उनके अनुसार, मजबूत चरित्र वाला समाज ही मजबूत राष्ट्र का आधार बनता है।
शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं
वी. भगय्या ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा व्यक्ति को जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनाती है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा केवल आर्थिक सफलता तक सीमित रह जाए, तो समाज के समग्र विकास का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
सामाजिक समरसता का संदेश
उन्होंने समाज में आपसी सहयोग, सद्भाव और समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, विविधताओं से भरे भारत में सभी वर्गों और समुदायों के बीच संवाद और सहयोग देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने युवाओं से सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर सकारात्मक सोच और रचनात्मक कार्यों में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
तकनीक और नवाचार का सही उपयोग
वी. भगय्या ने कहा कि आज का युवा तकनीक और डिजिटल संसाधनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक विकास के लिए भी उसका उपयोग करें।
उनके अनुसार, डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक उपयोग समाज में जागरूकता और विकास को गति दे सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरक संदेश
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि हर युवा अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करे, लेकिन साथ ही यह भी सोचे कि उसके कार्यों से समाज और देश को क्या लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता और राष्ट्रीय सेवा एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि युवा दोनों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ें, तो भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी
युवा संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी, युवा पेशेवर और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व, सामाजिक दायित्व और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे और प्रश्न पूछे।
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