
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा को एसआईटी ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। दोनों सगे भाई बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी सीआईडी में दर्ज केस संख्या 16/2026 के तहत की गई है। आरोप है कि दोनों ने कथित तौर पर बिचौलिये के माध्यम से परीक्षा में सेटिंग कराई और ओएमआर शीट में हेरफेर के जरिए प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की।
जांच एजेंसी को दोनों अभ्यर्थियों की भूमिका को लेकर कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। इसके बाद उनकी गतिविधियों और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अब उनसे पूरे नेटवर्क और परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर पूछताछ की जा सकती है।
मामले की जांच के केंद्र में बुद्धेश्वर भगत नाम का व्यक्ति भी है। आरोप है कि वह अभय तिवारी के लिए एजेंट के तौर पर काम करता था और अभ्यर्थियों से संपर्क कर परीक्षा पास कराने के नाम पर पैसे लेता था। सीआईडी की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा ने भी बुद्धेश्वर भगत के माध्यम से परीक्षा में सेटिंग की थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित सेटिंग के बाद ओएमआर शीट में हेरफेर किया गया और इसके जरिए अभ्यर्थियों को 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल कराया गया। हालांकि पूरे मामले में किस स्तर पर और किस तरह ओएमआर शीट में कथित बदलाव किया गया, इसकी विस्तृत जांच जारी है।
इस मामले में बुद्धेश्वर भगत की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर 11 ऐसे अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी दी, जिनसे प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के नाम पर रकम ली गई थी। इसके बाद सभी संबंधित अभ्यर्थी सीआईडी की जांच के दायरे में आ गए।
आरोप है कि बुद्धेश्वर भगत ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये लिए थे। इस तरह 11 अभ्यर्थियों से कुल एक करोड़ 10 लाख रुपये की राशि लिए जाने का आरोप है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह रकम किस-किस व्यक्ति तक पहुंची और कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। दोनों से पूछताछ के आधार पर एसआईटी यह जानने की कोशिश कर सकती है कि उनकी बुद्धेश्वर भगत से मुलाकात कैसे हुई, पैसे के लेन-देन का तरीका क्या था और परीक्षा पास कराने के लिए उन्हें किस तरह का भरोसा दिया गया था।
इसके साथ ही जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा ओएमआर शीट से जुड़ा हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ओएमआर शीट अभ्यर्थियों के उत्तर और मूल्यांकन का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होती है। ऐसे में यदि इसमें हेरफेर के आरोप की पुष्टि होती है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित बदलाव किस चरण में हुआ और किन लोगों की पहुंच संबंधित प्रक्रिया तक थी।
सीआईडी की एसआईटी इस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशने में जुटी है। केवल अभ्यर्थियों और बिचौलियों तक जांच सीमित रहेगी या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी, यह आगे की जांच पर निर्भर करेगा। जिन 11 अभ्यर्थियों की जानकारी बुद्धेश्वर भगत ने कथित तौर पर दी है, उनकी भूमिका की भी अलग-अलग जांच की जा रही है।
मामले में आर्थिक लेन-देन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। 11 अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.10 करोड़ रुपये लिए जाने के आरोप के बाद जांच एजेंसी के सामने रकम के प्रवाह का पता लगाने की चुनौती है। भुगतान नकद हुआ या किसी अन्य माध्यम से, रकम किसके पास पहुंची और इसका बंटवारा किस तरह हुआ, इन सवालों के जवाब जांच के लिए अहम होंगे।
दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा के सगे भाई होने के कारण जांच एजेंसी दोनों के बीच संपर्क और कथित लेन-देन की परिस्थितियों को भी खंगाल सकती है। दोनों प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए थे। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद एसआईटी के पास कथित परीक्षा सेटिंग से संबंधित और जानकारी मिलने की संभावना है।
प्रतियोगी परीक्षा में अनियमितता का मामला हजारों अभ्यर्थियों से सीधे जुड़ा होता है। अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में यदि पैसे लेकर किसी अभ्यर्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आते हैं तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। यही कारण है कि इस मामले की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सीआईडी की नजर उन अन्य अभ्यर्थियों पर भी है, जिनके नाम बुद्धेश्वर भगत की पूछताछ में सामने आने का दावा किया गया है। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आने वाले दिनों में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि किसी भी व्यक्ति की भूमिका और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
एसआईटी के सामने अब कथित नेटवर्क के शीर्ष तक पहुंचने की चुनौती है। अभय तिवारी, बुद्धेश्वर भगत, गिरफ्तार अभ्यर्थियों और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों के बीच कड़ियों की जांच से यह पता लगाया जाएगा कि कथित सेटिंग किस तरह संचालित की गई थी।
फिलहाल दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा की गिरफ्तारी से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितता का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। 11 अभ्यर्थियों से कुल 1.10 करोड़ रुपये लेकर परीक्षा पास कराने और ओएमआर शीट में कथित हेरफेर के आरोपों की जांच जारी है। अब एसआईटी की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी और यह जांच ही स्पष्ट करेगी कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोगों की भूमिका थी।





