
Jharkhand:सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के बंदोलोहार पंचायत अंतर्गत बंगुरडीह गांव में आयोजित आदिवासी यात्रा कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में बढ़ते जल संकट और सिंचाई समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में पेयजल, जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।
ग्रामीणों ने तैयार किया जल संसाधन मानचित्र
कार्यक्रम के दौरान युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने मिलकर गांव का जल संसाधन मानचित्र तैयार किया। इसमें खराब चापाकलों, कुओं की स्थिति, तालाबों की हालत, नहरों के गहरीकरण और जलमीनारों की स्थिति को चिन्हित किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि कई स्थानों पर जल संरचनाएं खराब स्थिति में हैं, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
पुरानी जल व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में बुजुर्गों ने पुराने समय की जल व्यवस्था और जल संरक्षण पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले गांवों में जल स्रोत अधिक सुरक्षित और उपयोगी थे, और लोग इन्हें अपनी परंपरा और जीवनशैली का हिस्सा मानते थे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति बिगड़ने पर चिंता भी जताई।
सांस्कृतिक महत्व पर जोर
ग्रामीणों ने कहा कि नई पीढ़ी जल स्रोतों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भूलती जा रही है। उन्होंने जल संरक्षण को केवल आवश्यकता नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बताया।
प्रशासन को दी गई जानकारी
बैठक के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) के अधिकारियों को फोन पर गांव की समस्याओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने खराब चापाकलों की शीघ्र मरम्मत का आश्वासन दिया।
आगे की योजना
यह अभियान अपना अधिकार संगठन, हो समाज महासभा और मुंडा-मानकी व्यवस्था के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है। इसमें कई गांवों में जल समस्याओं का सर्वे किया जा रहा है। आगे पंचायत और प्रखंड स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित कर स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।





