
रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में चल रही भूख हड़ताल के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भूख हड़ताल कर रहे छह प्रदर्शनकारियों में से तीन ने अपना उपवास समाप्त कर दिया है। इनमें झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र महतो भी शामिल हैं। वहीं, तीन अन्य प्रदर्शनकारी अब भी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से 2014 से आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद सामने आया है। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।
जानकारी के अनुसार, JLKM नेता देवेंद्र महतो पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उन्होंने सोमवार देर रात करीब 12 बजे अपना अनशन समाप्त किया। उनके साथ प्रदर्शन कर रहे प्रेम नायक और उम्मे हबीबा ने भी अपना उपवास खत्म कर दिया है।
हालांकि, आंदोलन में शामिल तीन प्रदर्शनकारी राहुल क्रांति, सबिता कुमारी और रूपेश पाल ने अभी भी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
यह आंदोलन JPSC-JSSC सुधार मंच के बैनर तले चल रहा है। मंच के सदस्यों के अनुसार, 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य में कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है, जिससे मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है। वे परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से भर्ती परीक्षाओं को लेकर की गई घोषणा को आंदोलनकारियों के एक हिस्से ने सकारात्मक कदम बताया है। सरकार ने कहा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए कराई गई परीक्षाओं की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द किया जाएगा।
देवेंद्र महतो ने अनशन खत्म करने के बाद सरकार के फैसले को आंदोलन की एक उपलब्धि बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
JPSC-JSSC सुधार मंच के सदस्यों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल परीक्षाओं को रद्द कराना नहीं बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार लाना है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए।
भूख हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही थी। लंबे समय तक उपवास के कारण कई प्रदर्शनकारियों की तबीयत प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर युवाओं में पहले भी नाराजगी देखने को मिली है। राज्य में JSSC और JPSC से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और समय पर परीक्षा परिणाम युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
वहीं, सरकार का कहना है कि युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में सुधार और अनियमितताओं को दूर करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
फिलहाल आंदोलन स्थल पर स्थिति सामान्य है। तीन प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बने हुए हैं, जबकि अन्य ने सरकार के फैसले के बाद अपना उपवास खत्म कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के आधार पर आंदोलन की दिशा तय होने की संभावना है।





