झारखंड

हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए झारखंड में तीन नए कॉरिडोर की पहचान

nidhi
1 Nov 2026 10:48 AM IST
हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए झारखंड में तीन नए कॉरिडोर की पहचान
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रांची: झारखंड में हाथियों की सुरक्षित आवाजाही और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। प्रकाशित खबर के अनुसार राज्य में हाथियों के तीन नए कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं और सैटेलाइट तस्वीरों से इनकी पुष्टि हुई है। अब इनके संरक्षण की तैयारी की जा रही है। हाथियों के आवागमन मार्गों की पहचान मानव-हाथी संघर्ष कम करने की व्यापक कवायद का हिस्सा है। हालांकि इन तीनों नए कॉरिडोर के नाम, विस्तृत सीमांकन और संरक्षण कार्यों का पूरा विवरण उपलब्ध खबर से स्पष्ट नहीं है।
हाथी कॉरिडोर ऐसे प्राकृतिक संपर्क मार्ग होते हैं जो अलग-अलग वन क्षेत्रों और आवासों को जोड़ते हैं। हाथी भोजन, पानी तथा अन्य प्राकृतिक जरूरतों के लिए इन रास्तों का उपयोग करते हैं। इनके बीच बाधाएं आने पर वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित होती है। झारखंड वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पुराने हाथी कॉरिडोर की बहाली और नए वैकल्पिक मार्गों की पहचान से संबंधित परियोजना दर्ज है। इसमें जीआईएस और अन्य तकनीकों का उपयोग करके मानव-हाथी संघर्ष घटाने का उद्देश्य बताया गया है। यह पहल आवासों की आपसी कनेक्टिविटी बनाए रखने से जुड़ी है।
विभागीय परियोजना में मौजूदा कॉरिडोर और आसपास के इलाकों में इंसानों तथा हाथियों के बीच होने वाली अंतःक्रिया को समझने पर जोर है। नए वैकल्पिक रास्तों की पहचान के लिए भोजन, पानी और आश्रय की उपलब्धता को आधार बनाया जाना है। साथ ही व्यवहार्य पुराने मार्गों और नए चिह्नित रास्तों की स्थिति सुधारने के उपाय तलाशना भी इसका उद्देश्य है। इससे स्पष्ट होता है कि कॉरिडोर संरक्षण केवल नक्शे पर रास्ता चिह्नित करने तक सीमित नहीं है। उस मार्ग का हाथियों के लिए उपयोगी और सुरक्षित बने रहना भी जरूरी है।
नए रास्तों की पहचान में सैटेलाइट तस्वीरों की भूमिका को इसी व्यापक प्रयास के संदर्भ में देखा जा सकता है। वन क्षेत्रों की निरंतरता और उनके बीच भूमि उपयोग की स्थिति समझने में स्थानिक जानकारी उपयोगी होती है। हालांकि मौजूदा खबर में यह स्पष्ट नहीं है कि तीन नए कॉरिडोर की पुष्टि के लिए किस अवधि की तस्वीरें और कौन सी विशिष्ट अध्ययन पद्धति इस्तेमाल की गई। इसलिए किसी खास तकनीक, एजेंसी या सर्वेक्षण अवधि को इस नई पहचान से जोड़कर बताना अभी उचित नहीं होगा।
राज्य में हाथियों के आवास और पारंपरिक मार्गों के विकास पर हाल में विभागीय बैठक भी हुई थी। 27 अक्टूबर को रांची स्थित वन मुख्यालय में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह वन बल प्रमुख संजीव कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम पर चर्चा की गई। इसमें प्राकृतिक आवास, चारागाह और कॉरिडोर विकसित करने के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई दलों को मजबूत करने और जागरूकता बढ़ाने की योजना भी चर्चा में रही।
हाथियों के प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराना इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभागीय बैठक से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार जंगलों में चारागाह और जलस्रोत विकसित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। साथ ही त्वरित कार्रवाई दलों को प्रशिक्षण, संचार सुविधाएं और आवश्यक संसाधन देने पर जोर दिया गया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर समय से प्रतिक्रिया देना और प्रभावित इलाकों में लोगों को सतर्क करना है। कॉरिडोर संरक्षण के साथ ऐसी तैयारी स्थानीय सुरक्षा के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
झारखंड में कॉरिडोर संरक्षण की जरूरत पहले के अध्ययन में भी सामने आ चुकी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की वर्ष 2023 की हाथी कॉरिडोर रिपोर्ट में सिल्ली-अनगड़ा मार्ग का विवरण दिया गया है। इसमें वन क्षेत्र के साथ कृषि भूमि और बस्तियों का उल्लेख है। राष्ट्रीय राजमार्ग, सिंचाई नहर और विद्युत लाइन जैसी संरचनाएं भी मार्ग में दर्ज हैं। रिपोर्ट में आवास की गुणवत्ता सुधारने, वनाग्नि से सुरक्षा और समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया दल की जरूरत बताई गई है। यह उदाहरण दर्शाता है कि प्रत्येक कॉरिडोर की चुनौतियां उसकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती हैं।
इससे पहले अगस्त में भी राज्य सरकार के स्तर पर हाथी कॉरिडोर की विस्तृत मैपिंग का विषय उठाया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैंपा संबंधी बैठक की रिपोर्ट के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और जरूरत के अनुसार सीमांकन पर जोर दिया गया। वन्यजीवों के लिए उपयोगी पौधरोपण, जल संरक्षण और विभिन्न विभागों के समन्वय की बात भी कही गई थी। विकास कार्यों के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित रखने का विषय इस चर्चा में शामिल था।
तीन नए कॉरिडोर की पहचान के बाद आगे की स्थिति उनके विस्तृत अध्ययन और संरक्षण संबंधी निर्णयों से स्पष्ट होगी। इनके लिए बजट, कार्य शुरू होने की तारीख या किसी विशेष निर्माण की घोषणा की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। फिलहाल महत्वपूर्ण बात नए आवागमन मार्गों का चिह्नित होना है। संरक्षण के अगले चरण में स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की सुरक्षा को साथ लेकर काम करना आवश्यक होगा। इससे हाथियों की आवाजाही और जंगलों के आसपास रहने वाले समुदायों के हितों के बीच बेहतर तालमेल की संभावना बनेगी।
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