
Jharkhand: गढ़वा जिले के भवनाथपुर क्षेत्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के भीतर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता भानु प्रताप शाही को हराने वाली मजबूत मानी जाने वाली तिकड़ी अब टूट गई है। इस तिकड़ी में शामिल प्रमुख सहयोगी दीपक प्रताप देव ने विधायक अनंत प्रताप देव उर्फ छोटे राजा से अलग होने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
शुक्रवार को श्री वंशीधर नगर में आयोजित प्रेस वार्ता में दीपक प्रताप देव ने स्पष्ट किया कि वे अब विधायक के साथ नहीं हैं, लेकिन वह जेएमएम में बने रहेंगे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही अपना सर्वमान्य नेता मानते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय पार्टी को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत से काम किया गया था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
दीपक प्रताप देव ने विधायक पर गुटबाजी और कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, काम कराने के दौरान लोगों को अलग-अलग गुटों से जोड़कर देखा जाता है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ वर्षों में कई बार विधायक को इस स्थिति में सुधार करने की सलाह दी गई, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। दीपक ने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि पूरे राज्य में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विकास हो रहा है।
दीपक प्रताप देव ने यह भी कहा कि भवनाथपुर क्षेत्र विकास के मामले में पिछड़ गया है और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने विधायक की सुस्ती को इसका मुख्य कारण बताया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वे पिछले 23 वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय रूप से जनता की सेवा कर रहे हैं।
भविष्य की राजनीति और टिकट को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपक ने कहा कि अभी 2029 के विधानसभा चुनाव में समय है, लेकिन वे अपनी बात पार्टी मंच पर मजबूती से रखेंगे। उन्होंने जेएमएम नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि यदि पार्टी चाहे तो स्वतंत्र सर्वे कराकर यह देख सकती है कि क्षेत्र में जनता के बीच किसकी लोकप्रियता अधिक है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भवनाथपुर की राजनीति में नई समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। एक ओर जहां पुरानी राजनीतिक तिकड़ी टूट गई है, वहीं दूसरी ओर जेएमएम के भीतर गुटबाजी और असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।





