
रांची। झारखंड में बार और क्लबों में मारपीट, हथियार लहराने और गोली चलने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई नियमावली तैयार करने की कवायद तो हुई, लेकिन करीब सात महीने बाद भी यह जमीन पर लागू नहीं हो सकी है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की ओर से तैयार की गई ‘झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026’ फिलहाल फाइलों में ही अटकी हुई है। इसके चलते राज्य में अब भी बारों का संचालन पुरानी नियमावली के तहत ही किया जा रहा है।
बार और क्लबों में होने वाली आपराधिक घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों में विवाद, ग्राहकों के बीच मारपीट, हथियारों का प्रदर्शन और गोलीबारी जैसी घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनती रही हैं। इन घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए नियमों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की गई थी। इसी उद्देश्य से उत्पाद विभाग ने नई नियमावली का मसौदा तैयार किया था।
7 फरवरी को जारी हुआ था ड्राफ्ट
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने करीब सात महीने पहले 7 फरवरी को बार संचालन से संबंधित नई नियमावली का ड्राफ्ट जारी किया था। इसे स्टेकहोल्डर्स और आम लोगों के लिए सार्वजनिक किया गया था। विभाग की ओर से नियमावली के मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं, ताकि संबंधित पक्षों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जा सकें।
सरकार की योजना थी कि सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नियमावली को संशोधित कर अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इसे राज्य में लागू किया जाएगा। नई नियमावली के लागू होने के बाद बार और क्लबों के संचालन से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने की उम्मीद थी।
लेकिन सात महीने बीत जाने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन, नई नियमावली अब तक प्रभावी नहीं हो पाई है।
पुरानी व्यवस्था के तहत चल रहे बार
नई नियमावली लागू नहीं होने का सीधा असर राज्य के बार संचालन की व्यवस्था पर पड़ रहा है। फिलहाल बार संचालकों को पुरानी नियमावली के तहत ही संचालन करना पड़ रहा है। यानी जिन सुधारों और नए प्रावधानों को लागू करने के उद्देश्य से नया ड्राफ्ट तैयार किया गया था, वे अभी व्यवहार में नहीं आ पाए हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि नई नियमावली की जरूरत महसूस की गई थी और उसका ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया था, तो उसे अंतिम रूप देने में इतनी देरी क्यों हो रही है। खासकर तब, जब बार और क्लबों में अनुशासन तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती रही हैं।
घटनाओं पर रोक लगाने की जरूरत
राज्य में बार और क्लबों से जुड़ी घटनाओं में कई बार विवाद गंभीर रूप ले लेते हैं। मारपीट से लेकर हथियार लहराने और गोली चलाने जैसी घटनाएं सामने आने के बाद इन प्रतिष्ठानों की निगरानी और संचालन व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
बार संचालन के लिए प्रभावी नियमों का उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मानकों का पालन हो। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था होना भी जरूरी है।
नई नियमावली के मसौदे को इसी व्यापक उद्देश्य से जोड़कर देखा गया था। लेकिन जब तक इसे अंतिम रूप देकर लागू नहीं किया जाता, तब तक प्रस्तावित नए प्रावधान केवल कागजों तक सीमित रहेंगे।
सुझाव और आपत्तियों के बाद भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया
ड्राफ्ट जारी करते समय विभाग ने स्टेकहोल्डर्स और आम नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नियमावली को व्यावहारिक और प्रभावी बनाना था। संबंधित पक्षों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाना था।
हालांकि, सात महीने का समय बीतने के बाद भी नियमावली को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे यह सवाल भी उठता है कि सुझाव और आपत्तियां मिलने के बाद उनकी समीक्षा की प्रक्रिया कहां तक पहुंची और अंतिम नियमावली कब तक लागू होगी।
बार संचालकों और प्रशासन दोनों के लिए जरूरी स्पष्ट नियम
नई नियमावली लागू होने से बार संचालकों को भी संचालन से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। वहीं प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए भी नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का आधार अधिक स्पष्ट हो सकता है।
बार और क्लबों में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, संचालन के समय, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जैसे विषयों पर स्पष्टता महत्वपूर्ण होती है। यदि नियमों में बदलाव प्रस्तावित है तो उसके समय पर लागू होने से ही उसका वास्तविक असर दिखाई देगा।
फाइलों में कैद सुधारों पर उठ रहे सवाल
नई नियमावली का ड्राफ्ट जारी हुए सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे में जिस सुधार की उम्मीद की गई थी, वह फिलहाल फाइलों में ही नजर आ रहा है।
बार और क्लबों में होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ नियम बनाना ही पर्याप्त नहीं है। नियमों को समय पर लागू करना और उनके पालन की प्रभावी निगरानी भी जरूरी है। नई नियमावली में यदि सुरक्षा और संचालन को लेकर बेहतर प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, तो उनके लागू होने में देरी का असर व्यवस्था पर पड़ सकता है।
अब निगाहें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग पर हैं कि वह ड्राफ्ट पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की प्रक्रिया कब पूरी करता है और संशोधित नियमावली को अंतिम रूप देकर कब लागू करता है। फिलहाल स्थिति यही है कि नई नियमावली सात महीने से फाइलों में है और राज्य के बार अब भी पुरानी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे हैं।





