झारखंड

खपरैल की झोपड़ी से इंफोसिस के CEO तक का सफर

Kavita2
25 July 2026 1:53 PM IST
खपरैल की झोपड़ी से इंफोसिस के CEO तक का सफर
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सरायकेला-खरसावां : अभावों के बीच पली-बढ़ी जिंदगी में यदि मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो सफलता की राह आसान हो जाती है। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के छोटे से गांव कृष्णापुर के रहने वाले आशीष कुमार दाश ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कभी खपरैल और पुआल की झोपड़ी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई की शुरुआत करने वाले आशीष अब देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) बनने जा रहे हैं।

आशीष की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और गांव के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

गांव की साधारण शुरुआत से वैश्विक पहचान तक

आशीष कुमार दाश का शुरुआती जीवन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। गांव के सामान्य परिवेश में जन्मे आशीष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कठिन परिस्थितियों में पूरी की। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के प्रति अपनी रुचि और मेहनत को कभी कम नहीं होने दिया।

बताया जाता है कि बचपन में वह खपरैल और पुआल से बनी झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करते थे। जमीन पर बैठकर ककहरा सीखने वाले आशीष ने कभी परिस्थितियों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया।

उनकी मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे उन्होंने राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

परिवार और गांव में खुशी का माहौल

आशीष कुमार दाश के इंफोसिस के शीर्ष पद पर पहुंचने की खबर से कृष्णापुर गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आशीष ने अपनी मेहनत से गांव का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है।

स्थानीय लोगों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एक छोटे से गांव से निकलकर देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक का नेतृत्व करना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि आशीष का सफर युवाओं को यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, लक्ष्य के प्रति समर्पण और लगातार प्रयास से सफलता हासिल की जा सकती है।

शिक्षा और मेहनत बनी सफलता की कुंजी

आशीष कुमार दाश की सफलता के पीछे उनकी शिक्षा, तकनीकी समझ और लंबे समय तक किया गया परिश्रम महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और आईटी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी अनुभव ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इंफोसिस जैसी वैश्विक कंपनी के सीईओ और एमडी का पद संभालना किसी भी पेशेवर के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।

इंफोसिस के नेतृत्व में अहम जिम्मेदारी

इंफोसिस भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल है और दुनियाभर में अपनी सेवाएं देती है। ऐसे में कंपनी के शीर्ष पद पर आशीष कुमार दाश की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीईओ और एमडी के रूप में उनके सामने कंपनी की विकास रणनीति को आगे बढ़ाने, नई तकनीकों के साथ तालमेल बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कंपनी को मजबूत बनाए रखने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने आशीष

आशीष कुमार दाश की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष से उपलब्धि तक पहुंचने की मिसाल है। गांव की सीमित सुविधाओं से निकलकर देश की बड़ी आईटी कंपनी के शीर्ष पद तक पहुंचना उनकी मेहनत और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता पाने के लिए केवल संसाधन ही जरूरी नहीं होते, बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पण और लगातार मेहनत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

आशीष की उपलब्धि को झारखंड के लिए भी गौरव का क्षण माना जा रहा है। राज्य के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की कॉरपोरेट दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल करना युवाओं के लिए नई उम्मीद पैदा करता है।

आज कृष्णापुर गांव के लोग उस बच्चे की कहानी गर्व से सुना रहे हैं, जिसने कभी मिट्टी के फर्श पर बैठकर पढ़ाई शुरू की थी और अब देश की सबसे प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों में से एक का नेतृत्व करने जा रहा है।

आशीष कुमार दाश का सफर साबित करता है कि सपनों को पूरा करने के लिए परिस्थितियों से ज्यादा जरूरी मेहनत, हौसला और आगे बढ़ने की इच्छा होती है।

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