
Jharkhand: कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की दर्दनाक दुर्घटना में जान गंवाने वाले धनबाद जिले के मजदूर गणेश कालिंदी का शव शुक्रवार सुबह उनके पैतृक गांव सालूकचापड़ा पहुंचा। जैसे ही शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम संस्कार गांव के समीप स्थित श्मशान घाट में किया गया। शव को उनके जीजा शिवनाथ बाध्यकर और भांजे गौतम बाध्यकर कोलकाता से लेकर गांव पहुंचे थे। घर पहुंचते ही परिजन शव से लिपटकर बिलख पड़े और पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। परिजन बार-बार यही कहते रहे कि “हमें मुआवजा नहीं चाहिए, हमें हमारा गणेश वापस लौटा दो।” यह दृश्य देखकर ग्रामीण भी भावुक हो गए और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
परिजनों के अनुसार गणेश कालिंदी मात्र 15 दिन पहले ही रोजगार की तलाश में कोलकाता गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह घर से निकला था, लेकिन अब वह ताबूत में बंद होकर वापस लौटा। उसकी मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतक अपने पीछे पत्नी लक्खी कालिंदी, तीन बेटियां मोमिता, निकिता, रितिका और एक बेटा जगरनाथ छोड़ गया है। इसके अलावा वृद्ध माता-पिता और अन्य परिजन भी गहरे दुख में हैं। घर का माहौल पूरी तरह गमगीन है और महिलाएं लगातार रो-रोकर बेसुध हो रही हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक लोग भी गांव पहुंचे। निरसा विधायक अरूप चटर्जी, जिला परिषद सदस्य बादल बाउरी और अन्य प्रतिनिधियों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। विधायक ने बच्चों की पढ़ाई में मदद करने की बात भी कही। परिजनों ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा घोषित मुआवजे पर आभार जताया, लेकिन साथ ही कहा कि किसी भी राशि से उनका दर्द कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
हादसे में साथ काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि घटना बेहद भयावह थी। उनके अनुसार बुधवार दोपहर सभी मजदूर काम के बाद बाहर निकले थे, तभी गणेश अपने कपड़े लेने दूसरी मंजिल पर गया और अचानक पूरा भवन ढह गया। वह मलबे में दब गया। चश्मदीदों ने यह भी बताया कि गणेश कुछ घंटों तक जिंदा था और मलबे के नीचे से फोन पर मदद की गुहार लगाता रहा। वह बार-बार कहता रहा कि उसे बचा लिया जाए, लेकिन भारी मलबे के कारण राहत कार्य में देरी हुई और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इस दर्दनाक घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और नम आंखों से गणेश को अंतिम विदाई दी गई।





