झारखंड

सिक्योरिटी मनी के नाम पर कंपनी ने हड़प लिए 76.78 लाख, ऑफिस पर भी किया कब्जा

Shantanu Roy
3 Nov 2021 6:12 AM GMT
सिक्योरिटी मनी के नाम पर कंपनी ने हड़प लिए 76.78 लाख, ऑफिस पर भी किया कब्जा
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मैक्लुस्कीगंज के रहने वाले गौतम कुमार साहू से दो कंपनियों ने सिक्योरिटी के नाम पर लिए 76.78 लाख रुपये हड़प लिए. वहीं गौतम के ऑफिस पर भी कब्जा कर लिया.

जनता से रिश्ता। मैक्लुस्कीगंज के रहने वाले गौतम कुमार साहू से दो कंपनियों ने सिक्योरिटी के नाम पर लिए 76.78 लाख रुपये हड़प लिए. वहीं गौतम के ऑफिस पर भी कब्जा कर लिया. कंपनी के द्वारा की गई बेईमानी से आहत गौतम ने अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाकर पुलिस से इंसाफ की गुहार लगाई है.गौतम ने ओटलर कंपनी के निदेशक महेश कुमार और रामकृष्ण उर्फ डॉ. राम शर्मा उर्फ रामकृष्ण शर्मा, वाइज प्रीसिडेंड रीतेश और केआरएस कंपनी के निदेशक सचिन त्यागी, ममता त्यागी, जेपी त्यागी, रघुनंदन पांडे के खिलाफ अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. दर्ज प्राथमिकी में गौतम ने हरमू स्थित उनके कार्यालय को सील करने और आरोपियों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है. दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. पुलिस आरोपियों को दबोचने की तैयारी कर रही है.

हरमू में खोला था कार्यालय
पीड़ित गौतम ने पुलिस को बताया कि हरमू में ओटलर लाइफ प्राइवेट लिमिटेड ब्रांच खोला था. फरवरी 2017 को कंपनी के साथ उनका इकरारनामा हुआ था. ओटलर हेल्थ केयर, पर्सनल केयर, होम केयर जैसी सुविधा प्रदान करती थी. मई 2021 में ओटलर लाइफ प्राइवेट लिमिटेड कंपना का केआरएस मल्टीप्रो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ विलय हुआ. यह कंपनी फरीदाबाद हरियाणा की है.
ओटलर के निदेशक चंडीगढ़ निवासी महेश कुमार और राम कृष्ण ने करार के अनुसार तीस लाख रुपए कंपनी के खाते में जमा कराया, जो करार समाप्ति के बाद लौटा दिया जाता. इसके बाद वह ओटलर के साथ व्यवसायी समाप्त करने की सूचना कंपनी को दी. साथ ही सिक्यूरिटी के नाम पर दिए गए पैसे वापस करने की मांग भी की, इस दौरान उसने पैसे देने की बात कही.
फर्जी चेक दिया, बाउंस होने के बाद राशि देने में करने लगे टालमटोल
इसी क्रम में केआरएस कंपनी ने रांची स्थित ओटलर कार्यालय बंद कर अपना ऑफिस खोल दिया. इसके बाद जून 2021 को केआरएस कंपनी के साथ उनके साथ समझौता किया. तीस लाख के व्यवसायी में हुए मुनाफे का अलग-अलग तीन प्रतिशत जून और जुलाई में देने की बात की लेकिन वह राशि उन्हें नहीं दिया गया. इसके बाद उन्हें एक फर्जी 30 लाख का चेक दिया गया, जो बांउस कर गया. इसकी जानकरी देने के बाद कंपनी के सभी अधिकारी राशि देने में टाल-मटोल करने लगे. केआरएस कंपनी के अधिकारी ओटलर से पैसे मांगने की बात कहने लगे, वहीं ओटलर केआरएस से कोई भी पैसे देने को तैयार नहीं हुआ.


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