
जमशेदपुर। मरीन ड्राइव पर हुए भीषण सड़क हादसे में कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद कार जिस तरह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई और घटनास्थल पर भयावह स्थिति बनी, उससे वाहन की तेज रफ्तार का अंदाजा लगाया जा रहा है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का भी मानना है कि दुर्घटना के समय कार की गति काफी अधिक रही होगी। हालांकि कार की वास्तविक रफ्तार की पुष्टि तकनीकी और फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसे की गंभीरता का अंदाजा कार की स्थिति से लगाया जा सकता है। टक्कर के बाद कार के कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों के मुताबिक दुर्घटना से पहले भी कार को मरीन ड्राइव क्षेत्र में तेज गति से आते-जाते देखा गया था। हादसे के बाद मौके पर कार की स्थिति देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ अजकार अली ने कार को हुए नुकसान के आधार पर अनुमान जताया है कि दुर्घटना के समय उसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रही होगी। उनके मुताबिक किसी वाहन को इस स्तर का नुकसान सामान्य गति पर होने वाली टक्कर में आमतौर पर नहीं होता। हालांकि उन्होंने भी वाहन की सटीक गति निर्धारित करने के लिए दुर्घटना से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच को जरूरी बताया।
हादसे के दौरान कार का एयरबैग खुला, लेकिन वह भी फट गया। विशेषज्ञ के मुताबिक सामान्य स्थिति में एयरबैग दुर्घटना के दौरान चालक और वाहन में सवार लोगों को गंभीर चोट से बचाने के लिए तेजी से खुलता है। इस हादसे में एयरबैग का बलून बाहर तो आया, लेकिन दुर्घटना की तीव्रता के बीच वह क्षतिग्रस्त हो गया।
अजकार अली के अनुसार एयरबैग इस तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति अत्यंत गंभीर दुर्घटना या वाहन के तेज रफ्तार में किसी भारी अथवा नुकीली वस्तु से टकराने पर बन सकती है। मरीन ड्राइव हादसे में वाहन को हुए नुकसान के आधार पर टक्कर की तीव्रता काफी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कार किस दिशा से आई, किस स्थान पर नियंत्रण बिगड़ा और टक्कर किस कोण पर हुई।
सड़क दुर्घटनाओं में किसी वाहन की वास्तविक रफ्तार का पता केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों को देखकर निश्चित रूप से नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, वाहन के इलेक्ट्रॉनिक डेटा, ब्रेक लगाने के निशान, दुर्घटनास्थल की स्थिति और टक्कर के बाद वाहन कितनी दूरी तक गया जैसे पहलुओं की जांच की जाती है। ऐसे में विशेषज्ञ की ओर से बताई गई 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति फिलहाल प्रारंभिक अनुमान है।
हादसे के बाद जांच में मरीन ड्राइव और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। कैमरों में कार दुर्घटना से कुछ समय पहले रिकॉर्ड हुई हो तो अलग-अलग स्थानों के बीच पहुंचने में लगे समय के आधार पर उसकी अनुमानित गति निकाली जा सकती है। इसके अलावा वाहन में उपलब्ध तकनीकी डेटा से भी दुर्घटना से ठीक पहले की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों से भी हादसे के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीन ड्राइव क्षेत्र में देर रात और कम यातायात के दौरान कई बार वाहन चालक तेज रफ्तार से गाड़ियां चलाते हैं। सड़क खाली दिखाई देने के कारण वाहन की गति बढ़ाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। मरीन ड्राइव जैसे क्षेत्र में अचानक किसी वाहन, व्यक्ति या सड़क किनारे मौजूद संरचना के सामने आने पर तेज रफ्तार में कार को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वाहन की रफ्तार बढ़ने के साथ दुर्घटना में लगने वाला प्रभाव भी काफी बढ़ जाता है। चालक के पास प्रतिक्रिया देने और ब्रेक लगाने का समय कम हो जाता है। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे वाहन को अचानक रोकना आसान नहीं होता। सड़क की स्थिति, टायर, ब्रेक, मौसम और चालक की प्रतिक्रिया जैसे कई कारक वाहन के रुकने की दूरी को प्रभावित करते हैं।
मरीन ड्राइव हादसे की गंभीरता ने एक बार फिर शहर की सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे वाली सड़क पर निर्धारित गति सीमा क्या थी और दुर्घटना के समय कार उस सीमा से कितनी अधिक गति पर चल रही थी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। इसके साथ ही वाहन की तकनीकी स्थिति की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हादसे के पीछे केवल तेज रफ्तार थी या किसी तकनीकी खराबी अथवा अन्य परिस्थिति ने भी भूमिका निभाई।
कार के एयरबैग, सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। आधुनिक कारों में कई सुरक्षा फीचर मौजूद होते हैं, लेकिन अत्यधिक तेज गति से होने वाली भीषण टक्कर में इनकी सुरक्षा क्षमता की भी सीमाएं होती हैं। इस दुर्घटना में एयरबैग के खुलने के बावजूद उसके फटने की बात सामने आने के बाद इसकी तकनीकी जांच अहम मानी जा रही है।
हादसे के कारणों की अंतिम तस्वीर पुलिस, फोरेंसिक और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल कार की क्षतिग्रस्त स्थिति और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ के आकलन के आधार पर दुर्घटना के समय वाहन की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि हादसे से ठीक पहले कार की वास्तविक गति कितनी थी और किन परिस्थितियों में चालक ने वाहन से नियंत्रण खोया।





