झारखंड

जेपीएससी घोटाले में टीडीपीएल अधिकारी का बड़ा खुलासा

Kavita2
14 Aug 2026 4:34 PM IST
जेपीएससी घोटाले में टीडीपीएल अधिकारी का बड़ा खुलासा
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रांची: जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने सीआईडी के सामने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। पूछताछ के दौरान उसने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़े मामलों को लेकर अहम खुलासे किए हैं।

सीआईडी की जांच में सामने आया है कि अभय कुमार तिवारी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी गतिविधियों और एजेंसी के कामकाज को लेकर कई जानकारियां जांच अधिकारियों को दी हैं। पूछताछ के दौरान उसने स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधारित भर्तियों में भी कमीशन के रूप में राशि मिलने की बात कही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर आधारित भर्तियों के मामले में उसे कमीशन के तौर पर नौ लाख रुपये मिले थे। इसके अलावा झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में टीडीपीएल एजेंसी को इंपैनल कराने के एवज में भी उसने पांच लाख रुपये कमीशन के रूप में लिए थे।

सीआईडी अब आरोपी के बयानों की जांच कर रही है और उससे जुड़े दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित कमीशन की रकम किन लोगों से और किस प्रक्रिया के तहत ली गई।

जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़ी एजेंसियों की भूमिका जांच के दायरे में है। सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन में कहां-कहां अनियमितताएं हुईं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

अभय कुमार तिवारी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था। परीक्षा संचालन एजेंसियों को सरकारी संस्थानों में काम दिलाने और इंपैनल कराने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

सीआईडी अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच को दिशा दी जा रही है। उसके संपर्क में रहे लोगों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल की जा सकती है।

जेपीएससी और जेएसएससी जैसी संस्थाएं राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाओं का आयोजन करती हैं। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है।

मेधा घोटाले की जांच के दौरान सीआईडी परीक्षा एजेंसियों, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की समीक्षा कर रही है। जांच एजेंसी का प्रयास है कि पूरे मामले में शामिल सभी लोगों तक पहुंचा जा सके।

आरोपी के बयान के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या अन्य सरकारी विभागों की भर्तियों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई थीं।

स्वास्थ्य विभाग की अनुबंध आधारित नियुक्तियों में कमीशन की बात सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों और प्रक्रियाओं की भी जांच की जा सकती है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के बयान को अंतिम साक्ष्य नहीं माना जा सकता। उसके दावों की पुष्टि दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर की जाएगी।

मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। सीआईडी लगातार संदिग्ध गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

जेपीएससी मेधा घोटाला मामला झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर बड़ा सवाल बन चुका है। अब जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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