
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और सुधारों की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। राज्य सरकार के साथ बातचीत के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे 10 अगस्त को राज्य विधानसभा तक मार्च करेंगे।
शुक्रवार शाम राज्य सरकार और JPSC/JSSC रिफॉर्म्स मंच के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत का पहला दौर हुआ। बैठक के बाद मंच के नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और अधिकारियों ने उनकी मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय होने के बाद ही वे अगला कदम तय करेंगे।
सरकार के साथ हुई पहली वार्ता
भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच शुक्रवार को बातचीत हुई। JPSC/JSSC रिफॉर्म्स मंच की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में छात्रों से जुड़े मुद्दे सरकार के सामने रखे।
बैठक के बाद मंच के एक नेता ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत सकारात्मक रही। सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया गया है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि आंदोलन तभी समाप्त होगा, जब सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई होगी।
छात्रों के मुताबिक, भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी उनकी शिकायतें केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। वे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग
छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना भी शामिल है। आंदोलनकारी इस परीक्षा को लेकर कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं और इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
मंच के प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने यह मुद्दा प्रमुखता से रखा। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान जरूरी है। जब तक इन सवालों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। इसलिए वे भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहे हैं।
आश्वासन से नहीं माने प्रदर्शनकारी
सरकार की ओर से मांगों पर विचार करने का भरोसा मिलने के बावजूद छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। मंच के नेताओं ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन अभी तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकार के आश्वासन को वे सकारात्मक कदम मानते हैं, लेकिन जब तक लिखित या स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे बातचीत के रास्ते को खुला रखते हुए अपनी मांगों के लिए दबाव बनाए रखेंगे।
रविवार तक का दिया समय
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार को रविवार तक का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
छात्रों ने 10 अगस्त को राज्य विधानसभा तक मार्च करने की चेतावनी दी है। इसके जरिए वे अपनी मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों तक सीधे पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि, मार्च के दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े इंतजाम किए जाने की संभावना है।
भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग
JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर छात्रों की मांगों में भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की अनिश्चितता या संदेह का सामना न करना पड़े।
छात्र परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध प्रक्रिया पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से हजारों युवाओं के करियर पर असर पड़ता है। इसलिए परीक्षाओं का आयोजन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर होनी चाहिए।
आंदोलनकारी छात्रों का रुख सख्त
वार्ता के बाद छात्रों का रुख नरम होने के बजाय फिलहाल सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत सकारात्मक होने के बावजूद आंदोलन समाप्त करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
मंच के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी सभी मांगों पर स्पष्ट फैसला ले।
छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी होती हैं तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन केवल आश्वासन के आधार पर पीछे हटना संभव नहीं है।
सरकार के सामने चुनौती
छात्र आंदोलन ने राज्य सरकार के सामने अब एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
यदि रविवार तक छात्रों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो 10 अगस्त का विधानसभा मार्च आंदोलन का अगला बड़ा चरण बन सकता है। ऐसे में सरकार को छात्रों के साथ बातचीत जारी रखते हुए उनकी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा।
10 अगस्त के मार्च पर नजर
फिलहाल शुक्रवार की वार्ता के बाद आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। सरकार ने छात्रों को उनकी मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है, लेकिन आंदोलनकारी सभी मांगों के समाधान पर जोर दे रहे हैं।
14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में सुधार से जुड़े मुद्दे छात्रों के आंदोलन के केंद्र में हैं। रविवार तक सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है।
यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की घोषणा के कारण राजधानी रांची में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल छात्रों और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन आंदोलन समाप्त होने के संकेत अभी नहीं मिले हैं।





