झारखंड

स्टील एक्सप्रेस बाल-बाल बची, बिजली ट्रिप होने से टला भयानक हादसा

Saba Naaz
19 July 2026 9:31 PM IST
स्टील एक्सप्रेस बाल-बाल बची, बिजली ट्रिप होने से टला भयानक हादसा
x

टाटा-हावड़ा रेलमार्ग: रविवार सुबह एक बहुत बड़ा रेल हादसा होते-होते बाल-बाल टल गया। गालूडीह थाना क्षेत्र के अंतर्गत चंद्ररेखा गांव के समीप स्वर्णरेखा नदी के रेलवे पुल (घाटर पुल) से गुजर रही 12814 टाटा-हावड़ा स्टील एक्सप्रेस के ऊपर 25 हजार वोल्ट की क्षमता वाला ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार अचानक टूटकर गिर गया। यह घटना सुबह करीब 06:50 बजे की है, जब ट्रेन अपनी रफ्तार में पुल को पार कर रही थी। हाईटेंशन तार के टूटकर गिरते ही जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और भयंकर चिंगारियां उठने लगीं, जिसके तुरंत बाद ट्रेन पुल के ठीक बीचों-बीच खड़ी हो गई। नदी के ऊपर बने पुल पर अचानक हुए इस हादसे और हाईटेंशन बिजली के तार को कोच की छत पर गिरता देख ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के बीच भारी दहशत और अफरा-तफरी फैल गई।

पुल के ऊपर फंसी ट्रेन के भीतर मौजूद यात्री इस कदर सहम गए कि अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में वे कोच के दरवाजों से नीचे उतरने लगे। कई यात्री जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक के सहारे पैदल ही पुल पार कर नेशनल हाईवे (NH) की ओर भागने लगे। इस बेहद खतरनाक स्थिति के बीच राहत की बात यह रही कि रेलवे के ऑटोमैटिक सुरक्षा सिस्टम ने समय पर काम किया। हाईटेंशन तार के टूटते ही ग्रिड से बिजली की सप्लाई तुरंत ट्रिप कर गई, जिससे तारों में दौड़ रहा करंट बंद हो गया। यदि बिजली ट्रिप न होती, तो पूरी ट्रेन में करंट फैल सकता था और एक अत्यंत भीषण व भयावह जनहानि हो सकती थी। सुरक्षा तंत्र की इस त्वरित प्रक्रिया की बदौलत ट्रेन में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे।

हादसे की सूचना मिलते ही दक्षिण पूर्व रेलवे की ट्रैक्शन रोलिंग डिस्ट्रीब्यूशन (TRD) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की विशेष तकनीकी टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। स्वर्णरेखा नदी के गहरे पुल पर मरम्मत कार्य को अंजाम देना बेहद जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण काम था। लेकिन सुरक्षा हेलमेट और आधुनिक उपकरणों से लैस तकनीकी कर्मियों ने अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। वे सीधे ट्रेन के एलएचबी (LHB) कुर्सीयान कोच की छत पर चढ़ गए और वहां से लटक रहे ओएचई तार को दुरुस्त करने के काम में जुट गए। इस बेहद जटिल मरम्मत कार्य के दौरान टाटा-हावड़ा जैसे व्यस्त रेलमार्ग पर कुछ समय के लिए ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से ठप रहा, जिससे यात्रियों को थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा।

इस घटना ने एक बार फिर दक्षिण पूर्व रेलवे जोन, विशेषकर चक्रधरपुर और खड़गपुर रेल मंडल के बुनियादी ढांचे और उनके रखरखाव (मेंटेनेंस) की पोल खोलकर रख दी है। हाल के दिनों में इस पूरे रेल खंड में ओएचई लाइन टूटने और यात्री व मालगाड़ियों के बेपटरी होने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। मानसून के आगमन से ठीक पहले रेलवे प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुचारू मेंटेनेंस को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चलती ट्रेन पर 25 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार का इस तरह गिरना इन दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों ने इस लापरवाही पर कड़ा रोष जताया है और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि बुनियादी ढांचे की नियमित और गहन जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को रोका जा सके।

Next Story