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बेटी-दामाद की हत्या पर पिता ने नहीं मानी हार
हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले के चर्चित इचाक दोहरे हत्याकांड में अदालत ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला राहुल मेहता (30) और उनकी पत्नी पूजा यादव (28) की हत्या से जुड़ा है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को अदालत ने फैसला सुनाते हुए प्रत्येक दोषी पर 3.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मृतका पूजा के पिता राम मूरत यादव ने बेटी और दामाद को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
दहेज विवाद में हत्या का आरोप
यह घटना वर्ष 2024 में हजारीबाग के इचाक क्षेत्र में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, राहुल मेहता और पूजा यादव की शादी को लेकर विवाद था। पूजा के पिता राम मूरत यादव उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के निवासी हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल के परिवार ने शादी स्वीकार करने के लिए 20 लाख रुपये की मांग की थी।
आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद दंपती के साथ मारपीट की गई और उन्हें अलग होने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। अभियोजन के मुताबिक, 15 और 16 जून 2024 की दरम्यानी रात दोनों को अर्धबेहोशी की हालत में आग के हवाले कर दिया गया था। मामले में अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई गई।
छह दोषियों को उम्रकैद की सजा
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम तरुण कुमार की अदालत ने मामले में सभी छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों में राहुल के पिता ईश्वर प्रसाद मेहता, चाचा बाबूलाल उर्फ बबलू मेहता और उनके सहयोगी बॉबी कुमार, विक्की कुमार, आशीष पांडेय तथा सोनू कुमार सिन्हा शामिल हैं।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120बी के तहत हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में उम्रकैद की सजा दी। इसके अलावा साक्ष्य गायब करने से संबंधित धारा 201 के तहत प्रत्येक दोषी को तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई गई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर कुल 3.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन ने मांगी थी अधिकतम सजा
सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा देने की मांग की थी। अभियोजन का कहना था कि दंपती की हत्या बेहद गंभीर परिस्थितियों में की गई और इस अपराध ने पीड़ित परिवार को गहरा नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 19 गवाहों के बयान पेश किए गए। इनमें शिकायतकर्ता राम मूरत यादव और जांच अधिकारी मोहम्मद शाहिद रजा भी शामिल थे। गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने सभी छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
बेटी और दामाद को न्याय दिलाने की लड़ाई
इस मामले में पूजा के पिता राम मूरत यादव की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बेटी और दामाद की मौत के बाद उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के जरिए न्याय की लड़ाई जारी रखी। अदालत में उनकी शिकायत और गवाही अभियोजन पक्ष के मामले का हिस्सा बनी। दोहरे हत्याकांड में फैसला आने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम पड़ाव आया है। अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है। इस फैसले से पीड़ित परिवार को कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण परिणाम मिला है।
हजारीबाग का यह मामला दहेज की मांग, वैवाहिक विवाद और हिंसा के गंभीर परिणामों को सामने लाता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि गंभीर अपराधों में पीड़ित परिवार के लिए न्याय पाने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। अदालत के फैसले के बाद अब मामले में सुनाई गई सजाओं और जुर्माने का कानूनी पालन महत्वपूर्ण होगा।
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