झारखंड

सरायकेला स्कूल सुरक्षा: 1082 स्कूलों में नहीं चारदीवारी, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

nidhi
7 Aug 2026 10:13 AM IST
सरायकेला स्कूल सुरक्षा: 1082 स्कूलों में नहीं चारदीवारी, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
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सरायकेला के 1082 स्कूलों में चारदीवारी नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।

सरायकेला : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिले के 1082 स्कूलों में चारदीवारी की कमी के कारण बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। कई स्कूल परिसरों में मवेशियों और आवारा कुत्तों के प्रवेश का खतरा बना रहता है।

शिक्षा के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के दावों के बीच स्कूलों की यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
बिना बाउंड्री के चल रहे कई स्कूल
जिले के कई विद्यालयों में अब तक परिसर की घेराबंदी नहीं हो पाई है। इससे स्कूल परिसर खुला रहता है और बाहरी जानवरों के आने-जाने की संभावना बनी रहती है।
शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है।
मवेशियों और आवारा कुत्तों से खतरा
चारदीवारी नहीं होने के कारण स्कूल परिसर में कई बार—
मवेशी प्रवेश कर जाते हैं।
आवारा कुत्तों का खतरा बना रहता है।
बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी में परेशानी होती है।
साफ-सफाई और अनुशासन प्रभावित होता है।
छोटे बच्चों के लिए ऐसी स्थिति अधिक जोखिम भरी मानी जा रही है।
अभिभावकों में चिंता
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित विकास का स्थान भी होना चाहिए। ऐसे में परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कई लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सभी स्कूलों में चारदीवारी निर्माण की मांग की है।
प्रशासन के सामने चुनौती
स्कूलों में बाउंड्री निर्माण के लिए बजट, जमीन और विभागीय प्रक्रिया जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। लेकिन बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है।
शिक्षा विभाग के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि सभी विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
सुरक्षित स्कूल जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों में चारदीवारी, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और सुरक्षित परिसर जैसी सुविधाएं बच्चों के बेहतर सीखने के माहौल के लिए जरूरी हैं।
सुरक्षित वातावरण से बच्चों की उपस्थिति और अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ता है।

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