
Jharkhand: रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने अलकतरा घोटाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक आरोपी ठेकेदार को दोषी ठहराया है, जबकि छह अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन था, जिस पर अब अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी मानते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त 6 माह की सजा भुगतनी होगी। यह निर्णय भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में न्यायिक सख्ती को दर्शाता है।
इस मामले में शामिल अन्य छह आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया है। बरी किए गए आरोपियों में विभिन्न विभागों से जुड़े सेवानिवृत्त और कार्यरत अभियंता शामिल हैं। इनमें सेवानिवृत्त जूनियर इंजीनियर रामप्रकाश साहू, सेवानिवृत्त कनीय अभियंता अखिलेश्वर सिंह, सेवानिवृत्त कनीय अभियंता ज्ञानचंद चौधरी, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता राधाकृष्ण प्रसाद, कनीय अभियंता भुवनेश्वर महतो और सहायक अभियंता उत्तम कुजूर का नाम शामिल है।
यह पूरा मामला आरसी 13/09 आर से संबंधित है। जांच के अनुसार, भुरकुंडा–पतरातू क्षेत्र में लगभग 6 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य के दौरान अलकतरा की खरीद सरकारी एजेंसी से किए जाने का प्रावधान था, लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए इसकी खरीद निजी एजेंसी से की गई। इसी अनियमितता को आधार बनाकर सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच एजेंसी की रिपोर्ट में यह सामने आया कि इस पूरे मामले में लगभग 20.23 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी। जांच के दौरान दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी निर्माण कार्यों में नियमों के उल्लंघन और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर न्यायपालिका सख्त रुख अपना रही है। वहीं छह आरोपियों के बरी होने से यह भी सामने आया कि सभी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
इस फैसले के बाद मामले से जुड़े विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।





