झारखंड

PM पोषण योजना में साहिबगंज सबसे नीचे, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील कवरेज पर सवाल

Kavita2
29 May 2026 5:24 PM IST
PM पोषण योजना में साहिबगंज सबसे नीचे, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील कवरेज पर सवाल
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Jharkhand झारखंड : झारखंड में स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण) की स्थिति को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। राज्य की नवीनतम वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में साहिबगंज जिला इस योजना के क्रियान्वयन में सबसे निचले पायदान पर पाया गया है।

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्यवर्ती भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन साहिबगंज जिले में इसका पूरा लाभ सभी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जिले के सरकारी विद्यालयों में नामांकित सभी बच्चों को मध्याह्न भोजन का पूर्ण कवरेज नहीं मिल रहा है।

यह खुलासा विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी राज्यस्तरीय वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में किया गया है, जिसमें साहिबगंज को पूरे झारखंड में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला जिला बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कई स्कूलों में भोजन वितरण में नियमितता की कमी, संसाधनों की कमी और निगरानी प्रणाली की कमजोरियों के कारण योजना का लाभ प्रभावित हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों पर सीधा असर पड़ रहा है।

साहिबगंज जिले की यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसी जिले के बरहेट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जिले के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिड-डे मील योजना बच्चों की शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाने और पोषण स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में योजना का कमजोर क्रियान्वयन बच्चों के शारीरिक और शैक्षिक विकास दोनों पर असर डाल सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में भोजन की नियमित उपलब्धता नहीं होने के कारण बच्चों की उपस्थिति पर भी असर पड़ रहा है। वहीं कुछ स्थानों पर स्कूल प्रशासन संसाधनों की कमी को प्रमुख कारण बता रहा है।

राज्य सरकार की ओर से इस रिपोर्ट के बाद सुधारात्मक कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि योजना का लाभ सभी बच्चों तक पहुंच सके और पोषण स्तर में सुधार हो सके।

फिलहाल रिपोर्ट ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके समाधान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

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