झारखंड

अंधविश्वास की बलिवेदी: सांप काटने के बाद झाड़-फूंक में गंवाई जान

Saba Naaz
26 Jun 2026 6:27 PM IST
अंधविश्वास की बलिवेदी: सांप काटने के बाद झाड़-फूंक में गंवाई जान
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सोनभद्र/गढ़वा। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और आधुनिकता के दावों के बीच अंधविश्वास की जड़ें आज भी कितनी गहरी हैं, इसकी एक बेहद दर्दनाक बानगी उत्तर प्रदेश और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में देखने को मिली है। सोनभद्र जिले में सर्पदंश की शिकार एक महिला की सिर्फ इसलिए मौत हो गई क्योंकि उसके परिजनों ने डॉक्टरों से पहले एक ओझा-गुणी पर भरोसा किया। सांप काटने के बाद बहुमूल्य समय झाड़-फूंक में बर्बाद कर दिया गया, और जब तक मरीज को अस्पताल पहुँचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

खेत से पानी भरने के दौरान हुआ हादसा

घटना सोनभद्र जिले के कोण थाना क्षेत्र अंतर्गत कचनारवा गांव (रोहिनमा दामर टोला) की है। मृतका की पहचान 47 वर्षीय तेतरी देवी के रूप में हुई है, जो शिवदास की पत्नी थीं। परिजनों के मुताबिक, गुरुवार की रात करीब आठ बजे तेतरी देवी अपने घर से कुछ ही दूरी पर स्थित एक खेत में लगे बोरिंग से पीने का पानी लेने गई थीं। पानी भरकर जब वे वापस लौट रही थीं, तभी अंधेरे में खेत की मेड़ पर घात लगाए बैठे एक अत्यंत विषैले सांप ने उनके दाहिने पैर में काट लिया। महिला की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिवार के लोग दौड़े-दौड़े मौके पर पहुँचे।

अस्पताल के बजाय ओझा के दर पर पहुँचे परिजन

सांप काटने के बाद जहाँ महिला को तुरंत किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए था, वहीं परिजन अंधविश्वास के चक्कर में पड़ गए। वे आनन-फानन में तेतरी देवी को गांव के ही एक ओझा-गुणी के पास झाड़-फूंक कराने के लिए ले गए। ओझा के पास कथित तौर पर काफी देर तक तंत्र-मंत्र का नाटक चलता रहा और इसके बाद परिजन महिला को वापस घर ले आए। इस पूरी प्रक्रिया में रात से लेकर अगले दिन सुबह तक का बेहद कीमती समय बर्बाद हो गया, जबकि सांप का जहर धीरे-धीरे महिला के पूरे शरीर में फैलता रहा।

अस्पताल पहुँचने से पहले ही थम गईं सांसें

शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे तेतरी देवी की हालत अचानक बेहद नाजुक हो गई। उनके शरीर में जहर के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे और वे अचेत होने लगीं। स्थिति को हाथ से निकलता देख परिजनों के हाथ-पांव फूल गए और वे आनन-फानन में उन्हें लेकर झारखंड के गढ़वा सदर अस्पताल भागे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने बारीकी से जांच की और महिला को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि यदि महिला को रात में ही एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) दे दिया जाता, तो उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती थी। घटना की सूचना पाकर गढ़वा पुलिस अस्पताल पहुँची, शव का पोस्टमार्टम कराया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया।

विशेषज्ञों की अपील: झाड़-फूंक मौत का रास्ता, अस्पताल ही एकमात्र विकल्प

इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख जताते हुए गढ़वा जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. संतोष मिश्रा ने ग्रामीण जनता से एक बार फिर अंधविश्वास से दूर रहने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती एक-दो घंटे मरीज की जिंदगी तय करते हैं। विशेषज्ञ की सलाह: डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि झाड़-फूंक या किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे सर्पदंश का इलाज नहीं हैं। सांप काटने पर मरीज को बिल्कुल शांत रखें, उसे चलने न दें और बिना एक मिनट गंवाए सीधे सरकारी अस्पताल ले जाएं। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम मुफ्त और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है। अंधविश्वास का रास्ता सिर्फ और सिर्फ मौत की ओर ले जाता है, इसलिए जागरूकता ही जान बचाने का एकमात्र उपाय है।

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