
Jharkhand झारखंड : आमतौर पर लोग शहद को सिर्फ एक या दो प्रकार के उत्पाद के रूप में जानते हैं, लेकिन झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड में एक युवा उद्यमी ने इस पारंपरिक सोच को बदल दिया है। महथाडीह निवासी सचिन प्रजापति ने शहद के उत्पादन और विपणन को एक नए स्तर पर पहुंचाते हुए 15 अलग-अलग किस्मों का शहद तैयार कर एक सफल उद्यम खड़ा किया है।
डोमचांच प्रखंड के महथाडीह गांव के रहने वाले सचिन प्रजापति ने अपनी मेहनत और नवाचार के बल पर ‘उमा बी फर्म’ नाम से एक कंपनी स्थापित की है। इस कंपनी के माध्यम से वे न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। उनका यह प्रयास आज कई युवाओं के लिए स्वरोजगार की प्रेरणा बन गया है।
सचिन प्रजापति द्वारा तैयार किए जा रहे शहद की खास बात यह है कि उन्होंने इसे केवल पारंपरिक शहद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विभिन्न औषधीय पौधों और प्राकृतिक स्रोतों से अलग-अलग प्रकार का शहद तैयार किया है। उनके पास तुलसी हनी, मोरिंगा हनी, कश्मीरी हनी, ब्लैक फॉरेस्ट हनी, बेरी हनी, रेड फॉरेस्ट हनी, लीची हनी, सरसों हनी, करंज हनी, लाल घास हनी, नीम हनी और जामुन हनी सहित कुल 15 प्रकार के शहद उपलब्ध हैं।
इन सभी प्रकार के शहद की कीमत उनकी गुणवत्ता और प्रकार के अनुसार 500 रुपये से लेकर 1400 रुपये प्रति किलोग्राम तक रखी गई है। अलग-अलग पौधों और फूलों से तैयार होने के कारण प्रत्येक शहद की अपनी विशेष सुगंध, स्वाद और औषधीय गुण बताए जाते हैं।
सचिन का कहना है कि उन्होंने शहद उत्पादन को सिर्फ एक पारंपरिक व्यवसाय के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे वैज्ञानिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से विकसित करने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया और किसानों को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया।
उनकी कंपनी ‘उमा बी फर्म’ के तहत न केवल शहद का उत्पादन किया जाता है, बल्कि इसके पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि इसे बाजार में एक अलग पहचान मिल सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वे देश के विभिन्न हिस्सों में अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सचिन प्रजापति की यह पहल न केवल आर्थिक रूप से सफल हो रही है, बल्कि इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कई ग्रामीण अब मधुमक्खी पालन से जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पारंपरिक कृषि के साथ-साथ इस प्रकार के वैल्यू-एडेड उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो रहे हैं।
सचिन प्रजापति की सफलता यह दर्शाती है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो छोटे स्तर पर शुरू किया गया काम भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है। आज उनका यह उद्यम न केवल कोडरमा जिले में बल्कि पूरे क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
उनकी इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि नवाचार और मेहनत के बल पर ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी बड़े व्यवसायिक अवसर पैदा कर सकते हैं और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान दे सकते हैं।





