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आरएस शर्मा की नई पहल
रांची: आधार और डिजिटल हेल्थ जैसे बड़े प्रोजेक्ट से जुड़े रहे पूर्व नौकरशाह आरएस शर्मा अब मरीजों के लिए सही डॉक्टर की तलाश आसान बनाने की दिशा में नया प्रयोग कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसरों और विद्यार्थियों के सहयोग से ‘डिस्कवरी ऑफ डॉक्टर’ नाम का प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मरीजों को उनकी जरूरत और बीमारी के मुताबिक उपयोगी डॉक्टर तक आसानी से पहुंचाना है।
आरएस शर्मा का कहना है कि देश में एक तरफ ऐसे कई डॉक्टर हैं जिनके पास मरीजों की भारी भीड़ रहती है, जबकि दूसरी तरफ कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास पर्याप्त समय होने के बावजूद मरीज नहीं पहुंच पाते। नया प्लेटफॉर्म इसी अंतर को कम करने की कोशिश करेगा। मरीज अपनी जरूरत के अनुसार डॉक्टर की खोज कर सकेंगे और उपलब्ध विशेषज्ञों तक पहुंच आसान हो सकेगी। फिलहाल यह प्रयोग शुरुआती चरण में है।
इसी बीच झारखंड में डिजिटल हेल्थ सेवाओं के विस्तार के तहत टेली-आईसीयू की भी शुरुआत की गई है। खूंटी, लातेहार, गुमला और चतरा जिलों में 10-10 बेड वाले टेली-आईसीयू शुरू किए गए हैं। इसके जरिए दूरदराज के अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी। टेली-आईसीयू व्यवस्था में स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीज की स्थिति से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचाते हैं। इसके बाद विशेषज्ञ मरीज की जांच रिपोर्ट, मॉनिटरिंग डेटा और अन्य जरूरी जानकारी देखकर इलाज को लेकर सलाह दे सकते हैं। इससे हर गंभीर मरीज को बड़े शहर तक रेफर करने की जरूरत कम हो सकती है। झारखंड में कई जिलों में अब भी आईसीयू और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 16 जिलों में आईसीयू सुविधाओं की उपलब्धता सीमित या नहीं है। ऐसे में टेलीमेडिसिन और टेली-आईसीयू जैसी तकनीक को दूरदराज के इलाकों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
टेली-आईसीयू परियोजना को झारखंड तक लाने में आरएस शर्मा ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस मॉडल को राज्य के लिए उपयोगी मानते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद सहयोग जुटाकर परियोजना को आगे बढ़ाया गया। आरएस शर्मा इससे पहले भी स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक से जुड़े बड़े काम कर चुके हैं। कोविड महामारी के दौरान वह टीकाकरण के डिजिटल सिस्टम से जुड़े रहे और बाद में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ के रूप में भी काम किया। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को लागू करने में भी उनकी भूमिका रही।
अब ‘डिस्कवरी ऑफ डॉक्टर’ प्लेटफॉर्म और टेली-आईसीयू जैसी पहल के जरिए तकनीक को सीधे मरीजों की सुविधा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अगर यह मॉडल व्यापक स्तर पर लागू होता है तो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचने में आसानी हो सकती है। झारखंड सरकार भी डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसी तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले इलाकों में इलाज की पहुंच बेहतर करना है।
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिल सकता है जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। टेली-आईसीयू और डिजिटल डॉक्टर खोज जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए इलाज की प्रक्रिया अधिक तेज, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने की कोशिश की जा रही है।
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