
Jharkhand झारखंड : झारखंड में जनजातियों के खिलाफ चल रहे अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य पुलिस की स्पेशल एक्शन टीम (सैट) के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह टीम वर्ष 2015-16 में जनजातियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए गठित की गई थी, लेकिन परिवर्तित परिस्थितियों को देखते हुए इसके आयामों में बदलाव की तैयारी की जा रही है।
झारखंड में सुरक्षा स्थिति और जनजातियों की गतिविधियों के स्वरूप में आए बदलाव के मद्देनज़र सैट की संख्या घटती है और इसे नए स्वरूप में ढालने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, मौजूदा 124 टीमों को 73 टीमों तक सीमित करने की अनुशंसा की गई है।
नए आयामों में इन टीमों में से 37 को क्राइम टास्क फोर्स (CTF) के रूप में तैनात किए जाने की योजना है, ताकि क्राइम कंट्रोल और जनजातियों के विरोधी अभियानों को और अधिक समन्वित तरीकों से संचालित किया जा सके।
इस संबंध में 15 जून को झारखंड जगुआर के उप महानिरीक्षक (DIG) इंद्रजीत महथा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जैप के मंथनजी कार्तिक एस और चाईबासा के मंथनजी अनुरंजन किस्पोट्टा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों के अनुसार, बैठक में नियत प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा रणनीति, बल की तैनाती और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि नियत परिस्थितियों के अनुसार बल की संरचना को अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाया जाए।
सूत्रों का कहना है कि नियत गतिविधियों में आई कमी और सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई क्षमता को देखते हुए यह पुनर्वास आवश्यक माना जा रहा है। इससे न केवल तैनाती का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि ऑपरेशन की गति और परिमाण भी वहीं।
कर्मियों का कहना है कि सैट के पुनर्वास से राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी तथा नियत प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस की कार्रवाई अधिक तेज और समन्वित हो।





