झारखंड

झारखंड के जंगलों को राहत, आग की घटनाएं 8000 से घटीं

Saba Naaz
19 July 2026 8:36 PM IST
झारखंड के जंगलों को राहत, आग की घटनाएं 8000 से घटीं
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रांची। झारखंड के जंगलों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं में इस साल भारी कमी दर्ज की गई है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ताजा फायर मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में झारखंड के जंगलों में आग लगने की केवल 1,750 घटनाएं सामने आई हैं, जबकि पिछले वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 8,399 था। यानी एक साल के भीतर जंगलों में आग की घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत की कमी आई है।

इससे पहले वर्ष 2023 में झारखंड में जंगलों में आग लगने की 12,590 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इस आंकड़े की तुलना में वर्ष 2026 में आग की घटनाओं में लगभग 86 प्रतिशत तक गिरावट आई है। वन विभाग इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है। विभाग का कहना है कि बेहतर निगरानी, जागरूकता अभियान, फायर वारियर्स की तैनाती और स्थानीय लोगों की भागीदारी के कारण जंगलों को आग से बचाने में सफलता मिली है।

झारखंड में जंगलों में आग लगने की घटनाएं मुख्य रूप से जनवरी से जून के बीच होती हैं। गर्मी के मौसम में सूखे पत्तों और वन क्षेत्र में फैली सूखी वनस्पतियों के कारण आग तेजी से फैलती है। हालांकि मानसून आने के बाद बारिश के कारण आग की घटनाएं लगभग खत्म हो जाती हैं। इस बार शुरुआती महीनों में ही वन विभाग ने विशेष रणनीति तैयार कर आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास शुरू कर दिए थे।

राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग ने जंगलों में आग रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में फायर वारियर्स की तैनाती की गई। वर्तमान में राज्य के वन क्षेत्रों में करीब 28 हजार फायर वारियर्स सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनकी संख्या आने वाले समय में बढ़ाकर 50 हजार करने की योजना है।

वन विभाग के अनुसार, जंगलों में आग लगने की कई घटनाएं ग्रामीणों द्वारा महुआ और तेंदु पत्ता संग्रहण के दौरान सफाई करने के लिए लगाई जाने वाली आग के कारण होती थीं। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया और लोगों को आग लगाने के नुकसान के बारे में जानकारी दी।

फायर वारियर्स ने ग्रामीणों को जंगल साफ करने के लिए आग के बजाय दूसरे सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा जंगल में कहीं भी आग लगने की छोटी घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग तक पहुंचाई गई, जिससे समय रहते आग पर काबू पाया जा सका।

वन विभाग ने फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से मिलने वाले रियल टाइम फायर अलर्ट का भी प्रभावी इस्तेमाल किया। जैसे ही किसी क्षेत्र में आग की सूचना मिली, विभागीय टीम और स्थानीय फायर वारियर्स तुरंत सक्रिय हो गए। कई मामलों में टीमों ने 10 से 20 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर आग को फैलने से रोक दिया।

इस अभियान में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही। महिलाओं ने जागरूकता फैलाने, आग रोकने और वन संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई। विभाग का मानना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना जंगलों को आग से बचाना संभव नहीं है।

झारखंड में कुल 23,765.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन फैला हुआ है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 29.81 प्रतिशत है। जंगलों में आग की कमी से न केवल पेड़-पौधों और वन संपदा की रक्षा हुई है, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण में भी मदद मिली है। जंगल की आग से हर साल बड़ी संख्या में वनस्पतियों और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने फरवरी 2026 में जंगलों की आग रोकने के लिए अधिकारियों के साथ विशेष कार्ययोजना तैयार की थी। इसके तहत फायर वारियर्स और मास्टर ट्रेनरों को आधुनिक उपकरणों के संचालन की ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

राज्य में आग की घटनाओं में कमी के बावजूद वन विभाग सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी जंगलों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत रखी जाएगी और ग्रामीणों को अभियान से जोड़ा जाएगा। झारखंड में जंगलों को आग से बचाने की यह सफलता पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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