
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार 16वें दिन भी जारी है। लंबे समय से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने रविवार को आंदोलनकारी उम्मीदवारों के साथ एक बार फिर बातचीत करने का फैसला किया है। शुक्रवार रात से शनिवार तक सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद रविवार को एक और दौर की वार्ता का निर्णय लिया गया।
हालांकि, छात्रों के एक प्रमुख गुट ने सरकार की ओर से दोबारा बातचीत की पहल को सकारात्मक कदम मानने के बजाय इसे ‘राजनीतिक चाल’ करार दिया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे केवल बातचीत नहीं, बल्कि अपनी मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय चाहते हैं। छात्रों के रुख से संकेत मिल रहा है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित या स्पष्ट आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन खत्म करने को लेकर सहमति बनना मुश्किल है।
शुक्रवार रात से शनिवार तक चली बातचीत
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने शुक्रवार रात JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यही मंच मौजूदा आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। इसके बाद शनिवार को भी सरकार और छात्र समूहों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा।
बैठकों में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों की शिकायतों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद रविवार को फिर बातचीत करने का निर्णय लिया गया।
छात्रों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का निष्पक्ष समाधान किया जाए और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। आंदोलन लंबा खिंचने के कारण सरकार पर भी जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
जयपाल सिंह स्टेडियम में भूख हड़ताल
इस बीच रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शनिवार देर रात करीब 3 बजे उनकी स्वास्थ्य स्थिति खराब होने की जानकारी सामने आई।
बताया गया कि जांच के दौरान उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल 53 दर्ज किया गया। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों में चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मेडिकल टीम ने शनिवार रात उन्हें कई बार जांचा।
महतो की बिगड़ती तबीयत ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को अब बातचीत के साथ-साथ तत्काल समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, क्योंकि आंदोलन में शामिल कुछ छात्र स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
सरकार की पहल पर छात्रों में नाराजगी
सरकार द्वारा रविवार को फिर बातचीत की घोषणा के बावजूद आंदोलनकारी छात्रों के एक वर्ग में नाराजगी बनी हुई है। उनका आरोप है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद सरकार उनकी मूल मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है।
एक प्रमुख छात्र समूह ने सरकार की नई बातचीत को राजनीतिक चाल बताया है। छात्रों का कहना है कि केवल बैठकों का दौर चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वे चाहते हैं कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों पर स्पष्ट रुख अपनाए और उन्हें ठोस कार्रवाई का भरोसा दे।
वहीं, सरकार के लिए भी यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि आंदोलन लगातार लंबा खिंच रहा है। छात्रों की बढ़ती संख्या और भूख हड़ताल की स्थिति के बीच सरकार पर गतिरोध खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों की नाराजगी नई नहीं है। इससे पहले भी झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थी सवाल उठाते रहे हैं।
मौजूदा आंदोलन में भी छात्रों का मुख्य जोर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच पर है। छात्र संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या संदेह की स्थिति उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से छात्र चाहते हैं कि सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाएं उनकी शिकायतों का स्पष्ट समाधान करें।
आंदोलन के आगे बढ़ने के संकेत
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर के बावजूद समाधान नहीं निकलने से आंदोलन के आगे भी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। इससे पहले भी बातचीत विफल रहने के बाद छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति पर विचार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने विधानसभा मार्च की योजना पर भी चर्चा की है।
ऐसे में रविवार की प्रस्तावित बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। लेकिन यदि वार्ता फिर बेनतीजा रही तो छात्रों के प्रदर्शन के और तेज होने की संभावना है।
देवेंद्र नाथ महतो की सेहत बनी अहम मुद्दा
इस पूरे आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती तबीयत ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। करीब एक सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे महतो का ग्लूकोज लेवल 53 तक पहुंचना उनकी स्वास्थ्य स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
छात्र नेताओं का कहना है कि लगातार भूख हड़ताल से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को बातचीत के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए।
आज की बातचीत पर टिकी नजर
अब रविवार को होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं। एक तरफ सरकार गतिरोध खत्म करने और छात्रों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपने मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग पर कायम हैं।
16 दिनों से जारी आंदोलन और भूख हड़ताल की पृष्ठभूमि में रविवार की वार्ता सरकार के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। यदि इस दौर में कोई ठोस समाधान निकलता है तो लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन को शांत किया जा सकता है। लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में आंदोलन के और व्यापक होने की आशंका बनी हुई है।
फिलहाल, झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह युवाओं के रोजगार, भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। रविवार की बातचीत यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि मामला समाधान की ओर बढ़ता है या छात्रों का आंदोलन और तेज होता है।





