झारखंड

रांची में राशन फर्जीवाड़ा, छह लाख से ज्यादा आय वाले 6556 परिवार लेते रहे सरकारी अनाज

Kavita2
1 Oct 2026 9:35 AM IST
रांची में राशन फर्जीवाड़ा, छह लाख से ज्यादा आय वाले 6556 परिवार लेते रहे सरकारी अनाज
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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी राशन योजना का लाभ लेने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में ऐसे 6556 परिवारों की पहचान हुई है, जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक है, इसके बावजूद वे जन वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले सरकारी राशन का लाभ लेते रहे। आय संबंधी आंकड़ों के सत्यापन के बाद यह मामला सामने आया है। अब जिला आपूर्ति विभाग ने ऐसे राशन कार्डधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और अब तक मिले सरकारी खाद्यान्न पर दी गई सहायता राशि की वसूली की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, इन परिवारों के सदस्यों की सालाना आय निर्धारित पात्रता सीमा से अधिक पाई गई है। नियमों के मुताबिक छह लाख रुपये सालाना से ज्यादा आय वाले परिवार इस श्रेणी के राशन लाभ के पात्र नहीं माने जाते। इसके बावजूद इन परिवारों के नाम राशन कार्ड से जुड़े रहे और वे सरकारी खाद्यान्न योजनाओं का फायदा उठाते रहे।

सबसे गंभीर बात यह है कि इन परिवारों में से कई वर्ष 2015 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले राशन का लाभ लेते रहे। बाद में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत उपलब्ध कराए गए मुफ्त खाद्यान्न का लाभ भी इन्हें मिलता रहा। लंबे समय तक पात्रता की जांच न होने के कारण यह मामला पकड़ में नहीं आ सका।

अब जिला आपूर्ति विभाग ने आय के आंकड़ों का मिलान करने के बाद ऐसे राशन कार्डधारियों की सूची तैयार की है। विभाग की ओर से संबंधित परिवारों को चिह्नित कर उनके राशन कार्ड की स्थिति की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने कितने समय तक सरकारी राशन लिया और इस दौरान सरकार की ओर से कितनी सहायता दी गई।

जांच में सामने आए 6556 परिवारों से राशन पर मिली सरकारी सहायता की राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विभाग अब यह आकलन करेगा कि संबंधित कार्डधारियों ने पात्रता नहीं होने के बावजूद कितनी मात्रा में खाद्यान्न लिया और उसकी सब्सिडी की कुल राशि कितनी बनती है। इसी आधार पर वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती या मुफ्त दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र परिवारों को चावल, गेहूं और अन्य खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता रहा है।

ऐसे में आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों द्वारा इस योजना का लाभ लेने से वास्तव में जरूरतमंद परिवारों के अधिकार पर असर पड़ता है। यही कारण है कि अब राशन कार्डों की पात्रता की जांच और आय से जुड़े रिकॉर्ड के सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।

रांची जिला आपूर्ति विभाग की जांच में आय से जुड़े आंकड़ों का मिलान किया गया। इस दौरान कई ऐसे परिवार सामने आए जिनके सदस्यों की आय छह लाख रुपये सालाना से अधिक है। इसके बावजूद उनके राशन कार्ड सक्रिय थे और उन्हें लगातार खाद्यान्न मिलता रहा।

जांच के बाद विभाग ने ऐसे कार्डधारियों पर कार्रवाई का फैसला लिया है। संबंधित परिवारों से सरकारी सहायता की राशि वापस लेने के साथ उनके राशन कार्ड की पात्रता भी दोबारा जांची जा रही है। यदि वे निर्धारित मानकों पर पात्र नहीं पाए जाते हैं तो उनके राशन कार्ड रद्द किए जा सकते हैं या उन्हें संबंधित योजना से बाहर किया जा सकता है।

यह मामला राशन कार्ड व्यवस्था में समय-समय पर सत्यापन की जरूरत को भी उजागर करता है। कई बार परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के बाद भी पुराने राशन कार्ड सक्रिय रहते हैं। ऐसे मामलों में कार्डधारक पात्रता सीमा से बाहर हो जाने के बावजूद सरकारी खाद्यान्न प्राप्त करते रहते हैं।

इसी कारण विभाग की ओर से अब आय, परिवार की आर्थिक स्थिति और अन्य सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। इससे राशन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

रांची में सामने आए इस मामले के बाद दूसरे क्षेत्रों में भी राशन कार्ड की पात्रता जांच को लेकर सतर्कता बढ़ सकती है। यदि इसी तरह आय संबंधी आंकड़ों का व्यापक स्तर पर सत्यापन किया जाता है तो और भी अपात्र राशन कार्डधारी सामने आ सकते हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता की शर्तें तय होती हैं। इन शर्तों को पूरा न करने वाले परिवार यदि गलत तरीके से लाभ लेते हैं तो उनके खिलाफ राशि वसूली समेत अन्य कार्रवाई की जा सकती है। रांची में जिला आपूर्ति विभाग ने इसी दिशा में कदम बढ़ाया है।

अब विभाग उन सभी 6556 परिवारों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है, जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। इनके द्वारा लिए गए राशन और सरकारी सब्सिडी का हिसाब तैयार किया जाएगा। इसके बाद संबंधित परिवारों से राशि की वसूली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस पूरे मामले ने जन वितरण प्रणाली में लाभार्थियों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अपात्र परिवार वर्ष 2015 से लगातार योजना का लाभ लेते रहे, तो यह निगरानी व्यवस्था में बड़ी कमी की ओर इशारा करता है।

फिलहाल जिला आपूर्ति विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इन 6556 परिवारों से कितनी राशि की वसूली की जाती है और कितने राशन कार्ड रद्द किए जाते हैं। प्रशासन का उद्देश्य अब यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राशन का लाभ केवल उन्हीं परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में इसके पात्र हैं।

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