झारखंड

रांची: रिनपास ने पूरे किए 100 वर्ष, मानसिक रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण

SHIDDHANT
3 Sept 2025 10:28 PM IST
रांची: रिनपास ने पूरे किए 100 वर्ष, मानसिक रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण
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RANCHI रांची: आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम) योजना के तहत मध्य प्रदेश के नीमच जिले में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उद्यानिकी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में नीमच टाउन हॉल में आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य ‘मीठी क्रांति’ को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करना, कृषि और बागवानी उत्पादन में वृद्धि करना, रोजगार सृजन करना और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कार्यशाला में जिले के चयनित किसान, मधुमक्खी पालक, उद्यमी और इच्छुक युवा भाग लेने पहुंचे। उन्हें वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, शुद्ध शहद उत्पादन, विपणन रणनीतियों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ और प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों ने आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन और वैश्विक बाजार से जुड़ने के अवसरों पर प्रशिक्षण दिया।
नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार ने कहा कि यह कार्यशाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मधुमक्खी पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं पर जोर दिया। उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक अतर सिंह कन्नौजी ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों और युवाओं को मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन और उद्यम स्थापना की प्रक्रिया से अवगत कराना है। कार्यशाला में युवा उद्यमी अनिल धाकड़ ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत 15 लाख रुपए ऋण और 35 प्रतिशत सब्सिडी के माध्यम से अपने गांव केलुखेड़ा में शहद उत्पादन और पैकेजिंग यूनिट स्थापित की। इस पहल से न केवल उनकी आय बढ़ी, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी मिला। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) के सहयोग से मिशन के तहत मधुमक्खी विकास केंद्र, शहद परीक्षण और रोग निदान प्रयोगशालाएं, एपि-थेरेपी सेंटर, बी-ब्रीडर्स और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
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