
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में भूजल संरक्षण को लेकर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहर में घरों में ट्यूबवेल या बोरवेल कराने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य होगी। रांची नगर निगम ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना वर्षा जल संचयन प्रणाली के किसी भी घरेलू भवन या उपभोक्ता को बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नगर निगम के नए आदेश के अनुसार, अब घरेलू उपयोग के लिए बोरिंग कराने वाले भवन मालिकों को पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही बोरवेल या ट्यूबवेल का निर्माण कराया जा सकेगा। साथ ही बोरिंग की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है। घरेलू उपभोक्ता अब अधिकतम 4 इंच तक की बोरिंग ही करा सकेंगे।
नगर निगम का कहना है कि यह फैसला लगातार गिरते भूजल स्तर और पानी की समस्या को देखते हुए लिया गया है। राजधानी रांची में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण भूजल पर दबाव बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग निजी बोरिंग के माध्यम से पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे भूजल स्तर में गिरावट की समस्या सामने आ रही है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की पहल
नगर निगम ने अपने आदेश में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी बताते हुए कहा है कि बारिश के पानी को संरक्षित करना बेहद आवश्यक है। वर्षा जल संचयन के जरिए जमीन के अंदर पानी का स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है।
अधिकारियों के अनुसार, रांची जैसे शहरों में बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर नालियों और सड़कों के जरिए बाहर चला जाता है। यदि इस पानी को वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित किया जाए तो इसका उपयोग भूजल को रिचार्ज करने में किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से नगर निगम ने बोरिंग की अनुमति को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ दिया है। अब भवन मालिकों को बोरिंग कराने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिसर में वर्षा जल संचयन की उचित व्यवस्था मौजूद है।
अनुमति के बिना बोरिंग पर होगी कार्रवाई
नगर निगम ने साफ किया है कि बिना अनुमति के बोरिंग कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भवन मालिकों को बोरिंग से पहले आवेदन देकर अनुमति लेनी होगी। जांच के बाद ही नगर निगम की ओर से अनुमति जारी की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं करने वालों पर जुर्माना लगाने और अन्य कार्रवाई करने का प्रावधान किया जा सकता है। नगर निगम की टीमें शहर में होने वाली अवैध बोरिंग पर भी नजर रखेंगी।
भूजल संकट को देखते हुए फैसला
रांची में पिछले कुछ वर्षों से गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति देखने को मिल रही है। कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे जाने के कारण निजी बोरिंग भी प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा लगातार बढ़ते निर्माण कार्य और पेड़ों की कमी से भी प्राकृतिक जल संरक्षण प्रभावित हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल का अत्यधिक दोहन आने वाले समय में बड़ी समस्या बन सकता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करना एक प्रभावी कदम हो सकता है।
भवन मालिकों को करना होगा पालन
नगर निगम के आदेश के बाद अब नए भवन निर्माण और पुराने मकानों में बोरिंग कराने वाले लोगों को नियमों का पालन करना होगा। भवन मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है।
नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे पानी बचाने की दिशा में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लोगों की परेशानी बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि भविष्य में जल संकट को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
रांची नगर निगम की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि शहर में भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि अब यह देखना होगा कि नए नियमों का जमीन पर कितना प्रभावी तरीके से पालन कराया जाता है। फिलहाल नगर निगम ने साफ कर दिया है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बिना नई बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।





