
Jharkhand झारखण्ड : डिजिटल युग से पहले देश में जनगणना जैसे विशाल राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में डाक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को रांची के आड्रे हाउस में आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी 'गेट योरसेल्फ काउंटेड: स्वतंत्र भारत में जनगणना का एक डाक इतिहास' में दर्शाया गया।
इस प्रदर्शनी में 1951 से 2011 तक की जनगणना प्रक्रिया से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, पोस्टकार्ड, डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण और अन्य अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की गई। यह आयोजन दर्शकों को यह समझाने का प्रयास करता है कि कैसे डाक विभाग ने देश भर में जनगणना की जानकारी फैलाने, लोगों तक सूचनाएं पहुंचाने और डेटा संग्रह में मदद करने में अहम योगदान दिया।
प्रदर्शनी में दर्शाया गया कि 1951 की पहली स्वतंत्र भारत जनगणना से लेकर 2011 की आधुनिक जनगणना तक, डाक विभाग ने लगातार स्थानीय स्तर पर सूचना प्रसार और अभिलेख संग्रह में सहायता की। पोस्टकार्ड और डाक टिकट जैसे माध्यमों के जरिए जनगणना की महत्वपूर्ण जानकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाई गई। इसके अलावा, प्रथम दिवस आवरण और अन्य अभिलेखीय सामग्रियों ने इस प्रक्रिया की ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शित किया।
प्रदर्शनी के आयोजक ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को यह बताना है कि जनगणना केवल सरकारी आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह समाज की संरचना और विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। डाक विभाग की सक्रिय भागीदारी ने सुनिश्चित किया कि देश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी जनगणना की जानकारी पहुँच सके और सभी नागरिकों को गिना जा सके।
विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में डाक कर्मचारियों ने घर-घर जाकर जनगणना फॉर्म वितरित किए और लोगों को भरने में सहायता की। डाक विभाग के सहयोग के बिना इतनी व्यापक जनगणना अभियान की सफलता असंभव मानी जाती थी। प्रदर्शनी में यह भी दिखाया गया कि कैसे समय के साथ तकनीकी बदलाव और डिजिटलीकरण ने इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया, लेकिन डाक विभाग का योगदान हमेशा ऐतिहासिक महत्व रखता रहा।
आड्रे हाउस में आयोजित इस प्रदर्शनी ने छात्रों, शोधकर्ताओं और आम जनता को आकर्षित किया। आगंतुकों ने इसे एक शिक्षाप्रद अनुभव बताया, जिससे उन्हें जनगणना के महत्व और डाक विभाग की ऐतिहासिक भूमिका का पता चला। प्रदर्शनी ने यह संदेश भी दिया कि जनगणना का हर नागरिक के जीवन से गहरा संबंध है, क्योंकि यह न केवल सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण को प्रभावित करती है, बल्कि समाज के विकास और नीतियों के निर्माण में भी मदद करती है।
इस दो दिवसीय प्रदर्शनी के माध्यम से डाक विभाग की भूमिका को उजागर करने का प्रयास किया गया है और यह दिखाया गया कि कैसे एक राष्ट्रीय अभियान में सरकारी संस्थानों का सहयोग नागरिकों को जोड़ने और देश के आंकड़ों को सटीक बनाने में कितना महत्वपूर्ण होता है।





