
झारखंड: लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में सरकारी योजना के तहत स्कूली छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्राओं को मिली कई साइकिलों की खराब स्थिति सामने आने के बाद अब योजना की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता जांच पर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता तसलीम खान ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
सरकार की ओर से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देने और शिक्षा के प्रति उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से साइकिल वितरण योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिलें उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि दूर-दराज के इलाकों से आने वाली बच्चियों को आवागमन में परेशानी न हो। लेकिन बरवाडीह क्षेत्र में वितरित की गई साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद योजना की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता तसलीम खान ने आरोप लगाया है कि कई विद्यालयों में छात्राओं को ऐसी साइकिलें दी गई हैं, जो इस्तेमाल करने योग्य नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कुछ साइकिलों के पहिए टेढ़े हैं, ब्रेक सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और सीट व पैडल भी ढीले पाए गए हैं। इसके अलावा साइकिलों में कई अन्य तकनीकी खामियां भी देखने को मिली हैं।
तसलीम खान का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ी इस योजना में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि साइकिलों की आपूर्ति से पहले उनकी गुणवत्ता की उचित जांच नहीं की गई। यदि बिना जांच के खराब सामग्री का वितरण किया गया है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने लातेहार उपायुक्त से मांग की है कि साइकिलों की खरीद प्रक्रिया, आपूर्ति करने वाली एजेंसी, गुणवत्ता परीक्षण और वितरण व्यवस्था की पूरी जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने दोषी आपूर्तिकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
वहीं, छात्राओं और उनके अभिभावकों ने भी खराब गुणवत्ता वाली साइकिलें मिलने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार की योजना का उद्देश्य छात्राओं को सुविधा देना है, लेकिन यदि उन्हें खराब या असुरक्षित साइकिलें मिलेंगी तो इसका लाभ मिलने के बजाय परेशानी बढ़ जाएगी। अभिभावकों ने मांग की है कि खराब साइकिलों को वापस लेकर छात्राओं को नई और मानक गुणवत्ता वाली साइकिलें उपलब्ध कराई जाएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई छात्राएं लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचती हैं। ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाली साइकिल उनके लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि शिक्षा जारी रखने का महत्वपूर्ण साधन है। यदि साइकिल खराब होगी तो छात्राओं को दोबारा पैदल या अन्य साधनों पर निर्भर होना पड़ेगा।
इस मामले के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में साइकिलों की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता और विशेषकर बच्चों व छात्रों को मिलता है। बरवाडीह में साइकिल वितरण विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब प्रशासन की कार्रवाई से ही साफ होगा कि छात्राओं को खराब साइकिलें कैसे मिलीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।





