झारखंड

झारखंड विधानसभा को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की तैयारी

SHIDDHANT
10 Feb 2026 10:06 PM IST
झारखंड विधानसभा को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की तैयारी
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Ranchi रांची। झारखंड विधानसभा को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की तैयारी चल रही है। 18 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के दौरान पहली बार नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) का परीक्षण के तौर पर उपयोग किया जाएगा। भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विधायी सुधार की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने मंगलवार को सदन के सभा कक्ष में ‘नेवा’ के संचालन के लिए लगाए गए डिजिटल उपकरणों और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
इसी कड़ी में बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा परिसर में बनाए गए ‘नेवा’ सेवा केंद्र का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य और सभी विधायक मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के साथ ही विधायकों और मंत्रियों को इस एप्लीकेशन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान मंत्रियों और विधायकों को कंप्यूटर टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे इस एप्लीकेशन के जरिए प्रश्नोत्तर, कार्यसूची, विधेयक, प्रस्ताव और अन्य विधायी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से समझ और उपयोग कर सकें।
उल्लेखनीय है कि ‘नेवा’ एक एकीकृत ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे देश की सभी राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की विधायी प्रक्रियाओं को डिजिटाइज करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत 44 मिशन मोड परियोजनाओं में शामिल है। इसका मूल उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ की अवधारणा के तहत सभी 37 विधानसभा सदनों को एक साझा डिजिटल मंच पर लाना और कागज के उपयोग को न्यूनतम करना है।
इस एप्लीकेशन के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही, समितियों की रिपोर्ट, प्रश्नोत्तर, एजेंडा, विधेयक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। यह प्लेटफॉर्म सदस्य-केंद्रित और डिवाइस-न्यूट्रल है, यानी इसे स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और डेस्कटॉप पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। नेवा को भारत के सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म मेघराज 2.0 पर होस्ट किया गया है, जिससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित होती है। बहुभाषी सुविधा के कारण यह विभिन्न राज्यों की भाषाई जरूरतों के अनुकूल भी है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल विधायी कामकाज अधिक पारदर्शी होगा, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
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