झारखंड
PLFI के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, कमांडर समेत 4 दबोचे
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 2:52 PM IST

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गुमला। झारखंड के गुमला जिले में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने संगठन के कथित जोनल कमांडर विश्राम कोंगाड़ी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को जिले में उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चारों की गिरफ्तारी की तारीख, कार्रवाई के स्थान और बरामद सामान का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
पीएलएफआई से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और संगठन की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि गिरफ्तार लोगों के संगठन से वर्तमान संबंध क्या थे और वे किन गतिविधियों में शामिल थे।
जोनल कमांडर विश्राम कोंगाड़ी का नाम आया सामने
इस कार्रवाई में सबसे प्रमुख नाम विश्राम कोंगाड़ी का बताया जा रहा है। उसे पीएलएफआई का जोनल कमांडर बताया गया है। हालांकि, संगठन में उसकी वर्तमान जिम्मेदारी की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।विश्राम कोंगाड़ी का नाम पहले भी उग्रवाद से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। जनवरी 2022 में खूंटी जिले के रनिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने विश्राम कोंगाड़ी और कुलेन कोंगाड़ी समेत तीन लोगों को पकड़ा था।उस समय पुलिस के अनुसार, विश्राम कोंगाड़ी सात आपराधिक मामलों में वांछित था, जबकि कुलेन कोंगाड़ी पांच मामलों में आरोपी था।पुलिस ने उस कार्रवाई के दौरान कारतूस, पीएलएफआई के पर्चे, चंदा रसीद, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद करने की जानकारी दी थी।
पीएलएफआई की गतिविधियों पर पुलिस की नजर
झारखंड में पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहा है। संगठन से जुड़े लोगों पर विभिन्न मामलों में रंगदारी, धमकी, अवैध हथियार रखने और हिंसक गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां संगठन के सक्रिय सदस्यों की पहचान करने तथा उनके नेटवर्क को कमजोर करने के लिए अभियान चलाती रही हैं।गुमला और आसपास के जिलों में उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां पूर्व में कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती रही हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा बलों को लगातार सतर्कता बरतनी पड़ती है।
गिरफ्तार लोगों से पूछताछ महत्वपूर्ण
कथित जोनल कमांडर समेत चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा संगठन से उनके संबंधों की पड़ताल होगी।जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना आवश्यक होगा कि गिरफ्तार लोगों का संपर्क किन व्यक्तियों से था और क्या वे किसी वर्तमान आपराधिक गतिविधि से जुड़े थे।इसके अलावा पुलिस पुराने मामलों और गिरफ्तारी के वर्तमान आधार की भी पड़ताल कर सकती है।हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में पूछताछ से क्या जानकारी सामने आई है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
पहले भी गिरफ्तार हो चुका है विश्राम कोंगाड़ी
झारखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड में विश्राम कोंगाड़ी उर्फ मोटा उर्फ सुकरा का नाम दर्ज है।आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वह खूंटी जिले के रनिया थाना क्षेत्र के डाहु पुरनापानी का निवासी बताया गया है।15 जनवरी 2022 को दर्ज रनिया थाना कांड संख्या 02/22 में विश्राम कोंगाड़ी और कुलेन कोंगाड़ी की गिरफ्तारी का उल्लेख है।इस मामले में शस्त्र अधिनियम और आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
पुलिस रिकॉर्ड में दो जिंदा कारतूस, पीएलएफआई की तीन चंदा रसीद और दो पर्चे बरामद होने की जानकारी भी दर्ज है।
गुमला में उग्रवाद के खिलाफ जारी है अभियान
गुमला जिले में पुलिस पहले भी विभिन्न प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चलाकर गिरफ्तारियां कर चुकी है।18 अगस्त 2026 को पुलिस ने डुमरी थाना क्षेत्र में झारखंड जनमुक्ति परिषद (JJMP) के सब-जोनल कमांडर रामदेव लोहरा समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।रामदेव लोहरा पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उस कार्रवाई में पुलिस ने एके-56, एसएलआर, सेमी-ऑटोमैटिक राइफल और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद किए थे।हालांकि, वह कार्रवाई जेजेएमपी संगठन के खिलाफ थी और उसे विश्राम कोंगाड़ी से संबंधित वर्तमान पीएलएफआई मामले से अलग समझना जरूरी है।
ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बड़ी प्राथमिकता
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में पूर्व में उग्रवादी गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है।रंगदारी और धमकी जैसी गतिविधियों के आरोपों से कारोबारियों, निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों और ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में कानून-व्यवस्था के प्रति भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।पुलिस के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रहती है कि आपराधिक गतिविधियों की शिकायत करने वाले लोगों को उचित सुरक्षा और कानूनी सहायता मिले।
संगठन के नेटवर्क की जांच हो सकती है अहम
विश्राम कोंगाड़ी समेत चार लोगों की गिरफ्तारी की सूचना के बाद पीएलएफआई के मौजूदा नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।यदि गिरफ्तार लोगों के संगठन से सक्रिय संबंधों की पुष्टि होती है, तो उनके संपर्कों और संभावित सहयोगियों की पहचान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।पुराने आपराधिक मामलों की स्थिति, न्यायालय में चल रही कार्रवाई और वर्तमान आरोपों के बीच अंतर स्पष्ट करना भी जरूरी होगा।किसी व्यक्ति की पूर्व गिरफ्तारी या आपराधिक मामले में नाम आने का अर्थ यह नहीं है कि वर्तमान मामले के सभी आरोप साबित हो गए हैं।पुलिस के आधिकारिक खुलासे का इंतजार
गुमला में कथित पीएलएफआई जोनल कमांडर विश्राम कोंगाड़ी समेत चार लोगों की गिरफ्तारी को लेकर अभी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आनी बाकी हैं।गिरफ्तार किए गए अन्य तीन लोगों के नाम, गिरफ्तारी का स्थान, बरामद हथियार या अन्य सामग्री और संबंधित प्राथमिकी का विवरण स्पष्ट होने के बाद मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
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