झारखंड

डर को हराकर 2500 बेजुबानों की जीवनदाता बनीं रजनी

Rajeshwari Nishad
12 Oct 2026 6:49 PM IST
डर को हराकर 2500 बेजुबानों की जीवनदाता बनीं रजनी
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जमशेदपुर : मां दुर्गा को शक्ति, साहस और करुणा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में देवी की आराधना के बीच जमशेदपुर की रजनी लाहेल अपने काम से साहस और जीवों के प्रति संवेदना की मिसाल पेश कर रही हैं। कभी सांपों को देखकर सिहर उठने वाली रजनी आज उनका कुशलता से रेस्क्यू करती हैं। बेजुबान जीवों की जान बचाने के जुनून ने उन्हें सांपों का कुशल रेस्क्यूअर बना दिया है। वह अब तक 2500 से अधिक सांपों को सुरक्षित बचाकर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ चुकी हैं।
लौहनगरी जमशेदपुर की रजनी की कहानी का सबसे उल्लेखनीय पहलू उनके डर और वर्तमान काम के बीच का अंतर है। जिस जीव को देखकर वह पहले सहम जाती थीं, आज उसी की सुरक्षा के लिए काम करती हैं। सांपों के प्रति उनका नजरिया भय तक सीमित नहीं रहा। अब वह उनका रेस्क्यू करके सुरक्षित जंगल में छोड़ती हैं। इस काम में उनका उद्देश्य सांपों की जान बचाना और उन्हें प्राकृतिक आवास तक पहुंचाना है। यही प्रयास उनकी पहचान का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
रजनी के काम का आंकड़ा भी उल्लेखनीय है। अब तक वह 2500 से अधिक सांपों को सुरक्षित बचा चुकी हैं। हालांकि, यह संख्या कितने वर्षों के दौरान दर्ज हुई, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। उनके रेस्क्यू किए गए सांपों की प्रजातियों और अलग-अलग स्थानों का ब्योरा भी नहीं दिया गया है। इसलिए इस संख्या के साथ किसी निश्चित अवधि या क्षेत्र का दावा नहीं किया जा सकता। सामने आई जानकारी उनके द्वारा बचाए गए सांपों की कुल संख्या को दर्शाती है।
सांप का रेस्क्यू करने के बाद रजनी उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ती हैं। उनके काम में जीव को बचाने के साथ उसे उपयुक्त स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया शामिल है। साझा विवरण में प्राकृतिक आवास के रूप में जंगल का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किन जंगलों में सांप छोड़े गए और यह प्रक्रिया किस व्यवस्था के तहत होती है, इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है। इसलिए किसी खास स्थान या विभागीय सहयोग का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।
कभी सांपों से डरने वाली रजनी अब पेशेवर अंदाज में उनका रेस्क्यू करती हैं। इस बदलाव के पीछे बेजुबान जीवों की जान बचाने का उनका जुनून बताया गया है। लेकिन उन्होंने रेस्क्यू का प्रशिक्षण कब लिया, किससे सीखा और इसकी शुरुआत किस घटना से हुई, उसका विवरण उपलब्ध नहीं है। उनके जीवन की किसी शुरुआती घटना या प्रशिक्षण की कहानी अनुमान से नहीं जोड़ी जा सकती। फिलहाल उनकी यात्रा के दो स्पष्ट पहलू हैं—पहले सांपों से डरना और अब उन्हें सुरक्षित बचाना।
नवरात्र के संदर्भ में रजनी का काम साहस और करुणा, दोनों को सामने लाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं। इसी समय रजनी की कहानी जीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की एक उदाहरण बनकर सामने आती है। हालांकि, रेस्क्यू का उनका काम केवल किसी धार्मिक अवसर तक सीमित बताया नहीं गया है। नवरात्र उनकी कहानी की प्रस्तुति का संदर्भ है, जबकि 2500 से अधिक सांपों को बचाने का आंकड़ा उनके अब तक के काम से जुड़ा है।
रजनी की पहचान केवल सांपों के करीब जाने के साहस से नहीं, उन्हें सुरक्षित बचाने के उद्देश्य से जुड़ी है। उनके काम का केंद्र बेजुबान जीवों की जान है। सांप को बचाकर प्राकृतिक आवास में छोड़ना इस उद्देश्य को पूरा करता है। उपलब्ध जानकारी में किसी खास रेस्क्यू का घटनाक्रम नहीं दिया गया है। इसलिए घर, कार, दुकान या अन्य किसी स्थान से सांप निकालने का उदाहरण उनके नाम से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। उनका काम यहां दिए गए सामान्य विवरण के आधार पर सामने है।
2500 से अधिक सांपों को बचाने की जानकारी रजनी के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन उससे जुड़े कई विवरण अभी उपलब्ध नहीं हैं। किस प्रजाति के कितने सांप बचाए गए, उनमें कितने घायल थे और किन परिस्थितियों में रेस्क्यू हुआ, इसका अलग रिकॉर्ड साझा नहीं किया गया है। इसलिए सभी सांपों को विषैले बताना या प्रत्येक रेस्क्यू को एक जैसी परिस्थिति से जोड़ना सही नहीं होगा। उनकी उपलब्धि सुरक्षित बचाए गए जीवों की संख्या के रूप में बताई गई है।
सांपों के रेस्क्यू का वर्णन करते समय उनकी कुशलता का उल्लेख जरूरी है। इसे देखकर किसी अनुभवहीन व्यक्ति को स्वयं सांप पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। रजनी की कहानी उनके कुशल रेस्क्यू के काम की है, किसी पकड़ने की विधि का परिचय नहीं। साझा विवरण में उपकरण, तकनीक या प्रक्रिया के चरण नहीं दिए गए हैं। इसलिए खबर में रेस्क्यू के तरीके जोड़ने के बजाय उनके उद्देश्य और काम पर ध्यान रखा गया है। जीव की सुरक्षा इस कहानी का मुख्य विषय है।
जमशेदपुर की रजनी लाहेल ने सांपों के प्रति अपने पुराने डर से आगे बढ़कर उन्हें बचाने का काम अपनाया है। उनका जुनून उन्हें कुशल रेस्क्यूअर की पहचान दे चुका है। अब तक 2500 से अधिक सांपों को सुरक्षित बचाकर जंगल में छोड़ने की जानकारी उनके प्रयासों को सामने लाती है। नवरात्र के दौरान उनकी कहानी साहस के साथ करुणा का भी उदाहरण है। उनके काम का संदेश बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना और उनकी जान बचाने के उद्देश्य में दिखाई देता है।
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