झारखंड

भर्ती में धांधली के आरोपों पर फूटा गुस्सा, रांची में छात्रों ने सरकार को दी चेतावनी

Ratna Netam
29 July 2026 6:37 PM IST
भर्ती में धांधली के आरोपों पर फूटा गुस्सा, रांची में छात्रों ने सरकार को दी चेतावनी
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रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार से शुरू हुआ यह विरोध बुधवार को भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए और वहां से अल्बर्ट एक्का चौक तक सत्याग्रह मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। तेज बारिश भी आंदोलनकारियों के हौसले को नहीं डिगा सकी। छात्रों ने स्पष्ट कहा कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में सुधार नहीं किया जाता और आयोगों की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं बनती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन में झारखंड के विभिन्न जिलों से छात्र शामिल हुए। हजारीबाग में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद कई छात्र ट्रेन और अन्य साधनों से रांची पहुंचे। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया चाहते हैं, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आए हैं, जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने कई प्रतीकात्मक तरीके अपनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। कुछ प्रदर्शनकारी 'शर्म का गुलदस्ता' लेकर पहुंचे, जबकि कई छात्रों ने तवा पीटकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में 'फर्जी अभय तिवारी' लिखे पोस्टर भी दिखाई दिए, जिन्हें छात्रों ने कथित भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। उनका कहना था कि इस तरह के पोस्टर किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के विरोध का संदेश हैं।

प्रदर्शनकारियों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और उसके बाद राष्ट्रगान गाकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा। छात्रों का कहना था कि वे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं तथा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

आंदोलन के दौरान कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं के पहुंचने पर भी विवाद की स्थिति बनी। जेएलकेएम ने आंदोलन को समर्थन दिया, लेकिन कई छात्रों ने साफ कहा कि यह पूरी तरह अभ्यर्थियों का आंदोलन है और इसे किसी भी राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। जेएलकेएम नेता देवेंद्र महतो के पहुंचने पर कुछ छात्रों ने विरोध भी जताया और कहा कि वे आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे। प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल भर्ती व्यवस्था में सुधार कराना है।

छात्रों ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार, भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाना, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ी कार्रवाई और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट नियमावली लागू करना शामिल है। कुछ छात्रों ने यह भी मांग उठाई कि भर्ती घोटालों की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के हालिया परिणामों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि परिणाम जल्दबाजी में जारी किए गए और चयन प्रक्रिया को लेकर कई संदेह बने हुए हैं। अभ्यर्थियों ने मांग की कि सभी विवादित भर्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि योग्य उम्मीदवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर डटे रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे संवाद की मांग की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास का सवाल है।

फिलहाल रांची में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और आंदोलन पर लगातार नजर रखी जा रही है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक उनका सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। आंदोलन ने झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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