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गैस कटर से खुली तिजोरी
गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के रमना बाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पास मकान की नींव की खुदाई के दौरान मिली रहस्यमयी लोहे की तिजोरी का आखिरकार राज खुल गया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में गैस कटर से तिजोरी खोली गई तो उसमें से 8 पुराने चांदी के सिक्के, एक चांदी का लॉकेट और 41 तांबे के सिक्के बरामद हुए। शुरुआती प्रशासनिक आकलन में इन सिक्कों को वर्ष 1880 से 1920 के बीच का बताया जा रहा है।
तिजोरी का लॉक काफी मजबूत था, इसलिए इसे सामान्य तरीके से नहीं खोला जा सका। सोमवार को अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर मिर्धा, एसडीपीओ सत्येंद्र नारायण सिंह, सीओ विकास पांडेय और थाना प्रभारी आदित्य कुमार नायक की मौजूदगी में गैस कटर की मदद ली गई। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
तिजोरी के अंदर मिले आठ चांदी के सिक्कों पर उर्दू में अंकन है। चांदी के सिक्कों और लॉकेट का कुल वजन 89.73 ग्राम बताया गया है। मौजूदा बाजार भाव के आधार पर इनकी कीमत करीब 20 हजार रुपये आंकी गई है। इसके अलावा 41 पुराने तांबे के सिक्के भी मिले हैं, जिनकी ऐतिहासिकता की जांच की जा रही है।
यह तिजोरी 11 सितंबर को मकान की नींव के लिए खुदाई के दौरान मिली थी। इसके बाद इलाके में खजाना मिलने की अफवाह फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। तिजोरी खुलने से पहले ही कई परिवारों ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताते हुए दावा पेश किया था। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए तिजोरी को कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया था। तिजोरी खोले जाने के दौरान दावा करने वाले परिवारों के लोग भी मौजूद रहे। प्रशासन ने बरामद सभी सामानों की सूची तैयार कर उन्हें सुरक्षित रखा है। अब तिजोरी और बरामद सिक्कों पर स्वामित्व से जुड़े दावों की जांच की जाएगी और उसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
करीब एक महीने तक रहस्य बनी रही इस तिजोरी में बहुत बड़े खजाने के बजाय पुराने सिक्के और लॉकेट निकले, लेकिन इनका ऐतिहासिक महत्व स्थानीय स्तर पर काफी दिलचस्प माना जा रहा है। प्रशासनिक जांच के बाद यह और स्पष्ट हो सकेगा कि ये सिक्के किस काल और किस शासन व्यवस्था से संबंधित हैं।
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