
Jharkhand: गुमला से एक प्रेरणादायक और सकारात्मक संदेश देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार ने बेटी के जन्म को पूरे उत्सव की तरह मनाया। यह मामला गुमला सदर अस्पताल का है, जहां अधिवक्ता मुकेश पाठक की पत्नी रजनी कुमारी ने एक बेटी को जन्म दिया। नवजात के आगमन से परिवार में खुशी का माहौल छा गया और उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारी की।
परिवार ने बेटी के स्वागत के लिए एक कार को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया। उसी सजी-धजी कार से मां और नवजात बच्ची को अस्पताल से घर ले जाया गया। जब यह कार अस्पताल परिसर में पहुंची तो वहां मौजूद मरीजों के परिजन, कर्मचारी और अन्य लोग हैरान रह गए। सभी यह जानने को उत्सुक थे कि इतनी भव्य तैयारी किसके लिए की गई है।
जब लोगों को पता चला कि यह स्वागत किसी वीआईपी या बड़े अधिकारी के लिए नहीं, बल्कि एक नवजात बेटी के लिए किया गया है, तो सभी ने इस पहल की सराहना की। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया और कहा कि इस तरह की सोच से बेटियों के प्रति नजरिया बदल सकता है।
इस खुशी के मौके पर परिवार की ओर से अस्पताल में करीब 21 किलो रसगुल्ले भी बांटे गए। अधिवक्ता मुकेश पाठक ने कहा कि बेटी उनके लिए लक्ष्मी के समान है और उसके जन्म पर उतनी ही खुशी मनाई जानी चाहिए जितनी बेटे के जन्म पर मनाई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल खुशी व्यक्त करना नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि बेटियां किसी भी तरह से बेटों से कम नहीं हैं।
उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी का प्रसव सरकारी अस्पताल में कराया और वहां की सेवाओं से वे संतुष्ट हैं। डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ के व्यवहार और देखभाल की उन्होंने सराहना की और लोगों से सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करने की अपील की।
यह घटना केवल एक परिवार की खुशी नहीं बल्कि समाज में बदलती सोच का प्रतीक बनकर सामने आई है। पहले जहां बेटियों के जन्म को लेकर उदासीनता देखी जाती थी, वहीं अब कई लोग इसे खुशी और गर्व के अवसर के रूप में मनाने लगे हैं। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि बेटियां सम्मान, समान अवसर और प्यार की हकदार हैं।





