
Jharkhand: झारखंड में ग्रामीण कार्य विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य के किसी भी प्रमंडल से ग्रामीण पुलों की मरम्मत का प्रस्ताव मुख्यालय को नहीं भेजा गया है। इस कारण राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थित दर्जनों जर्जर पुल बरसात में खतरे की जद में आ गए हैं और इनके ढहने की आशंका बढ़ गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग ने मानसून से पहले सभी प्रमंडलों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कमजोर और जर्जर पुलों की पहचान कर मरम्मत का प्रस्ताव भेजें, ताकि समय रहते उनकी मरम्मत की जा सके। निर्देशों में यह भी कहा गया था कि जिन पुलों की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए।
इसके बावजूद किसी भी प्रमंडल से कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया, जिससे यह साफ हो गया है कि निचले स्तर पर अधिकारियों ने निर्देशों की अनदेखी की है। अब स्थिति यह है कि लगातार बारिश के चलते इन पुलों की मरम्मत तकनीकी रूप से भी कठिन हो गई है।
हर साल झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान पुल और पुलियों के बह जाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। इसके पीछे खराब रखरखाव के साथ-साथ नदियों से होने वाला अवैध बालू खनन भी एक बड़ा कारण माना जाता है, जिससे पुलों की नींव कमजोर हो जाती है।
प्रशासन की ओर से इस बार पहले से तैयारी कर नुकसान रोकने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रस्ताव न आने के कारण योजना अधर में लटक गई। अब यदि इस मानसून में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।





