
झारखण्ड : पलामू से लोकसभा सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में नियम 377 के तहत बनिया, कमलापुरी, जायसवाल, कसौधन और बरनवाल समाज को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इन समुदायों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर विचार करने की अपील की।
सांसद ने सदन में कहा कि इन समुदायों के लोग लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद केंद्रीय OBC सूची में इनका नाम शामिल नहीं होने के कारण उन्हें केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं और सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विष्णु दयाल राम ने कहा कि राज्य स्तर पर कई जगहों पर इन समुदायों को पिछड़ा वर्ग का दर्जा प्राप्त है, लेकिन केंद्रीय सूची में शामिल नहीं होने के कारण केंद्र सरकार के स्तर पर मिलने वाले आरक्षण और अन्य लाभों से वे वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने लोकसभा में बताया कि झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बनिया, कमलापुरी, जायसवाल, कसौधन और बरनवाल समाज को OBC वर्ग में शामिल किया गया है। लेकिन केंद्रीय OBC सूची में इन समुदायों का नाम दर्ज नहीं होने से खासतौर पर युवाओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सांसद ने कहा कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए केंद्रीय OBC सूची में शामिल होना आवश्यक है। सूची में नाम नहीं होने की वजह से इन समुदायों के योग्य उम्मीदवारों को अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाना है। ऐसे में जिन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें योजनाओं का लाभ मिलना जरूरी है।
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इन समुदायों की स्थिति का उचित मूल्यांकन कर इन्हें केंद्रीय OBC सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि इससे लाखों लोगों को शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों में मदद मिल सकेगी।
सांसद ने यह भी कहा कि किसी भी समाज के विकास के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। केंद्रीय सूची में शामिल होने से इन समुदायों के युवाओं को उच्च शिक्षा और सरकारी सेवाओं में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि सामाजिक न्याय की भावना के तहत ऐसे वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने की आवश्यकता है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर OBC सूची में शामिल किए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। विभिन्न समुदाय अपने सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षणों के आधार पर पिछड़ा वर्ग का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं। केंद्रीय OBC सूची में किसी समुदाय को शामिल करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और संबंधित संस्थाओं की सिफारिशों के आधार पर पूरी की जाती है।
पलामू सांसद की ओर से लोकसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद इन समुदायों से जुड़े लोगों में उम्मीद जगी है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्रीय OBC सूची में शामिल होने से शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में उठाए जाने वाले कदमों पर है। यदि सरकार इस मांग पर आगे बढ़ती है तो इससे संबंधित समुदायों को केंद्रीय योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।





