
Jharkhand: रांची/झारखंड। झारखंड के धनबाद, खरसावां और नोवामुंडी प्रखंडों में 28 जून से 30 जून 2026 तक पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी ताकि उन्हें इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है।
धनबाद जिले में इस अभियान के दौरान कुल 4,24,729 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान को सफल बनाने के लिए 1976 बूथ बनाए गए हैं, जिनमें स्थायी, ट्रांजिट और मोबाइल बूथ शामिल हैं। इसके अलावा 392 सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है और 137 सब-डिपो से दवा की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। अभियान की शुरुआत 28 जून को सदर अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में की जाएगी। 29 और 30 जून को स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों तक पहुंचेंगी जो बूथ पर नहीं आ सके।
सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड में भी 28 जून से तीन दिवसीय अभियान शुरू होगा। यहां 11,317 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 112 पोलियो बूथ, 2 ट्रांजिट बूथ और एक मोबाइल टीम बनाई गई है। साथ ही 23 सुपरवाइजर और 230 वैक्सीनेटरों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि हर दिन कम से कम पांच बूथों का निरीक्षण किया जाए ताकि अभियान की प्रगति पर नजर रखी जा सके।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड में भी पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा, जहां 20,160 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां 165 बूथ और 19 ट्रांजिट बूथ बनाए गए हैं। 28 जून को सभी बूथों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दवा दी जाएगी, जबकि 29 और 30 जून को घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी छूटे हुए बच्चों तक पहुंचेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि “दो बूंद जिंदगी की” अभियान के तहत पोलियो उन्मूलन को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अभियान में आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं, स्वास्थ्य कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर कार्य करेंगे। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी बूथ पर ले जाकर पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं।
अधिकारियों ने कहा कि पोलियो मुक्त समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे। अभियान की निगरानी के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है जो लगातार समीक्षा करेगी।
इस प्रकार झारखंड के तीनों क्षेत्रों में यह तीन दिवसीय अभियान बड़े पैमाने पर चलाया जाएगा, जिससे लाखों बच्चों को जीवनरक्षक सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।





