
हंसडीहा (दुमका): झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट प्रखंड अंतर्गत बनियारा पंचायत से ग्रामीण आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ लंबे समय से व्याप्त विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। कड़कड़ाती और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए भारी संख्या में ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों ने पंचायत सचिवालय परिसर में एकत्रित होकर जोरदार जन-प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। ग्रामीणों की इस एकजुटता के बाद मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और दुमका उपायुक्त (डीसी) के नाम एक विस्तृत 10 सूत्री मांग पत्र तैयार किया गया। इस ज्ञापन को पंचायत सचिव और मुखिया के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक भेजने के लिए सौंपा गया।
पेंशन, आवास भुगतान और शिक्षा को लेकर उठाई आवाज
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से सामाजिक सुरक्षा और गरीब कल्याण योजनाओं में हो रही लापरवाही को उजागर किया गया है। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: लंबित पेंशन और योजना राशि: सामाजिक सुरक्षा के तहत दी जाने वाली वृद्धा पेंशन और दिव्यांग पेंशन की रुकी हुई राशि का तुरंत भुगतान किया जाए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत लंबित पड़ी सम्मान राशि को भी जल्द से जल्द महिलाओं के खातों में ट्रांसफर किया जाए। आवास योजना की बकाया किस्त: अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन लाभार्थियों के मकान आधे-अधूरे पड़े हैं, उनकी बकाया किस्तों को बिना किसी देरी के जारी किया जाए ताकि गरीब अपने आशियाने को पूरा कर सकें। शिक्षा व्यवस्था में सुधार: बनियारा बेसिक स्कूल में संसाधनों की कमी को दूर करते हुए इसे उत्क्रमित (अपग्रेड) किया जाए और इसी सत्र से कक्षा नौवीं व दसवीं की पढ़ाई शुरू कराई जाए, जिससे स्थानीय छात्र-छात्राओं को दूर न जाना पड़े। जल संकट का समाधान: पंचायत सचिवालय परिसर में पेयजल की घोर किल्लत को दूर करने के लिए तत्काल प्रभाव से नया चापाकल लगाया जाए और जोंकी बांध के नाला (डांड) का जीर्णोद्धार कराया जाए ताकि कृषि कार्य सुचारू रूप से हो सके।
स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और मानदेय भुगतान पर भी रहा जोर
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने सिर्फ बुनियादी ढाँचे ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और बाल विकास से जुड़ी सेवाओं की बदहाली पर भी गहरा रोष प्रकट किया। ज्ञापन में मांग की गई है कि पंचायत के अलग-अलग टोलों में, जहाँ अभी तक आंगनबाड़ी केंद्र के अपने भवन नहीं हैं, वहाँ नए भवनों का निर्माण कराया जाए। इसके अलावा, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं के कई महीनों से लंबित पड़े मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में इलाज के लिए उन्हें मीलों दूर जाना पड़ता है, इसलिए बनियारा पंचायत में एक सुसज्जित स्वास्थ्य उपकेंद्र (हेल्थ सब-सेंटर) की स्थापना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को नियमित मानदेय देने और पेसा (PESA) कानून को पंचायत क्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
जन-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीणों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह प्रदर्शन तो सिर्फ एक शुरुआत है। अगर जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने इन बेहद जरूरी 10 सूत्री मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द धरातल पर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में बनियारा पंचायत के ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय का घेराव करेंगे और इससे भी बड़ा व उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।





