
धनबाद : झारखंड के बहुचर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में करीब 15 वर्ष तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। धनबाद स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने इस मामले में झारखंड के पूर्व पशुपालन मंत्री और धनबाद के पूर्व कांग्रेस विधायक मन्नान मल्लिक समेत 28 नामजद आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
हालांकि अदालत ने सभी दोषी ठहराए गए आरोपियों को उच्च न्यायालय में अपील दायर करने का अवसर देते हुए 30 दिनों की औपबंधिक (प्रोविजनल) जमानत भी प्रदान की है। इस अवधि के भीतर आरोपी उच्च अदालत का रुख कर सकते हैं।
यह मामला धनबाद के मटकुरिया क्षेत्र में हुई गोलीबारी की घटना से जुड़ा है, जिसने उस समय पूरे राज्य में व्यापक चर्चा बटोरी थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई लोगों के नाम सामने आए और आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद अदालत में सुनवाई शुरू हुई। लंबे समय तक चले मुकदमे में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अनेक गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
करीब डेढ़ दशक तक चली इस सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक सहित कुल 28 आरोपियों को दोषी माना और उन्हें समान सजा सुनाई।
निर्णय सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। फैसले के दौरान अदालत परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, पक्षकार और अन्य लोग मौजूद रहे।
अदालत ने अपने आदेश में दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया। प्रत्येक दोषी को 10 हजार रुपये का जुर्माना जमा करना होगा। निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उन्हें कानून के अनुसार अतिरिक्त दंड का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि दोषियों को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने का अवसर मिलना चाहिए। इसी कारण उन्हें 30 दिनों की औपबंधिक जमानत प्रदान की गई है, ताकि वे निर्धारित अवधि के भीतर अपील दाखिल कर सकें।
मामले में फैसला आने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक झारखंड की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और कांग्रेस के टिकट पर धनबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में अदालत के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि निचली अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बाद अब मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। यदि दोषी अपील दायर करते हैं, तो वहां इस फैसले की कानूनी समीक्षा होगी। उच्च न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों, निचली अदालत के निर्णय और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अंतिम निर्णय देगा।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन अदालतें उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अपना निर्णय सुनाती हैं। लगभग 15 वर्षों तक चले इस मुकदमे में अनेक तारीखों पर सुनवाई हुई, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अभियोजन तथा बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद दोषी ठहराए गए सभी 28 आरोपियों को अपील के लिए अस्थायी राहत मिली है। अब उनकी अगली कानूनी रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। यदि वे उच्च न्यायालय में अपील दायर करते हैं, तो मामले की आगे की सुनवाई वहां होगी।
धनबाद का यह बहुचर्चित मामला वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित था और इससे जुड़े फैसले का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शुक्रवार को विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए निर्णय के साथ इस मुकदमे के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन हो गया। हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, क्योंकि दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार सुरक्षित है।





