झारखंड

खूंटी में गेंदा खेती से बदली किसानों की तकदीर

Kavita2
2 Aug 2026 1:58 PM IST
खूंटी में गेंदा खेती से बदली किसानों की तकदीर
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खूंटी। कभी अफीम की अवैध खेती के लिए चर्चित रहे झारखंड के खूंटी जिले के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में अब गेंदा फूल की खेती बदलाव की नई कहानी लिख रही है। कम लागत, बेहतर बाजार और अच्छे मुनाफे के कारण गेंदा की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए समृद्धि और सम्मानजनक आजीविका का माध्यम बनती जा रही है।

जिले में पिछले करीब डेढ़ दशक से गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदान संस्था के सहयोग और खूंटी महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड की पहल से बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती को अपना रहे हैं।

इस पहल ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है, बल्कि क्षेत्र की पहचान को भी बदलने में मदद की है। जहां पहले अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा होती थी, वहीं अब यहां के किसान अपनी मेहनत से फूलों की खुशबू के जरिए नई पहचान बना रहे हैं।

1500 किसान जुड़े, बढ़ रही है आमदनी

गेंदा फूल की खेती से वर्तमान में खूंटी, मुरहू और अड़की प्रखंड के करीब 1500 किसान जुड़े हुए हैं। किसानों को खेती की तकनीक, पौधों की उपलब्धता और बाजार से जुड़ी जानकारी देकर इसे एक संगठित व्यवसाय का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

किसानों का कहना है कि गेंदा की खेती में कम लागत आती है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है। शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में फूलों की मांग अधिक होने के कारण किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है।

कई किसानों ने बताया कि पारंपरिक फसलों की तुलना में गेंदा फूल की खेती से उन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिला है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें गांव में रहकर रोजगार का अवसर मिला है।

15 लाख पौधों के वितरण का लक्ष्य

इस वर्ष गेंदा फूल की खेती को और विस्तार देने के लिए किसानों के बीच 15 लाख पौधों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। शनिवार से पौधों का वितरण शुरू कर दिया गया।

संस्था और सहकारी समिति की ओर से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन बेहतर हो सके। इसके साथ ही किसानों को खेती की सही तकनीक, पौधों की देखभाल और बाजार प्रबंधन की जानकारी भी दी जा रही है।

अधिकारियों और संस्था के प्रतिनिधियों का मानना है कि अधिक से अधिक किसानों को इस खेती से जोड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी

गेंदा फूल की खेती में महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खूंटी महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड के माध्यम से बड़ी संख्या में महिला किसान इससे जुड़ी हैं।

महिला किसानों को खेती के साथ-साथ उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है और वे परिवार की आय में योगदान दे रही हैं।

अवैध खेती छोड़ अपनाया नया रास्ता

खूंटी जिले के कुछ इलाकों में पहले अफीम की अवैध खेती एक गंभीर समस्या रही थी। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों से किसानों को वैकल्पिक आजीविका के साधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया।

गेंदा फूल की खेती इसी बदलाव का एक उदाहरण बनकर सामने आई है। किसानों को यह समझाया गया कि वैध और लाभकारी खेती के माध्यम से भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।

आज कई किसान फूलों की खेती को अपनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश भी दे रहे हैं।

बाजार और प्रशिक्षण से मिल रहा लाभ

गेंदा फूल की खेती को सफल बनाने के लिए केवल पौधे उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि किसानों को बाजार से जोड़ना भी जरूरी है। इसके लिए संस्था और सहकारी समिति की ओर से किसानों को बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी भी दी जाती है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और किसानों को बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल रही है।

खूंटी में बदल रही खेती की तस्वीर

गेंदा फूल की खेती ने खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण जगाई है। यह पहल दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार सहयोग मिलने पर किसान अपनी आजीविका के नए रास्ते बना सकते हैं।

अब खूंटी के कई गांवों में खेतों में लहलहाते गेंदा के फूल केवल खेती नहीं, बल्कि बदलाव, आत्मनिर्भरता और विकास की कहानी कह रहे हैं।

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