झारखंड

चाईबासा में 10 लाख के इनामी माओवादी ने किया सरेंडर

Kavita2
8 Aug 2026 10:58 AM IST
चाईबासा में 10 लाख के इनामी माओवादी ने किया सरेंडर
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चाईबासा। झारखंड में चल रहे एंटी नक्सल अभियान के बीच सुरक्षाबलों और पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। चाईबासा पुलिस के सामने शुक्रवार को 10 लाख रुपये के इनामी माओवादी जोनल कमांडर सालूका कायम ने सरेंडर कर दिया। उसके साथ उसकी पत्नी पिंकी और एक अन्य माओवादी कोदोमुनी कोड़ा ने भी आत्मसमर्पण किया। पुलिस के मुताबिक, इस आत्मसमर्पण के बाद सारंडा के जंगलों और चाईबासा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान को बड़ी उपलब्धि मिली है।

पुलिस के सामने तीनों के आत्मसमर्पण को क्षेत्र में माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सालूका कायम लंबे समय से संगठन से जुड़ा बताया जाता है और उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके सरेंडर से सुरक्षा एजेंसियों को क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

लंबे समय से सक्रिय था सालूका कायम

सालूका कायम को माओवादी संगठन का जोनल कमांडर बताया गया है। वह लंबे समय से चाईबासा और सारंडा के जंगलों में संगठन की गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। उसके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही थीं।

सारंडा का घना जंगल लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षाबलों के लिए यहां अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में संगठन के एक इनामी जोनल कमांडर का पुलिस के सामने आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

पत्नी पिंकी ने भी किया आत्मसमर्पण

सालूका कायम के साथ उसकी पत्नी पिंकी ने भी पुलिस के सामने सरेंडर किया। इसके अलावा कोदोमुनी कोड़ा ने भी आत्मसमर्पण किया है।

तीनों के एक साथ मुख्यधारा में लौटने के फैसले को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पुलिस अब आत्मसमर्पण करने वाले तीनों लोगों से पूछताछ कर संगठन की गतिविधियों, नेटवर्क, ठिकानों और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा सकती है।

सारंडा में अभियान को मिली मजबूती

चाईबासा और सारंडा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से सुरक्षाबलों की ओर से लगातार एंटी नक्सल अभियान चलाया जा रहा है। जंगलों में सर्च ऑपरेशन, संदिग्ध ठिकानों की तलाशी और माओवादी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

इन अभियानों के बीच कई स्तरों पर सुरक्षाबलों को सफलता मिली है। अब 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर के सरेंडर को अभियान की बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया जा रहा है।

पुलिस का मानना है कि शीर्ष स्तर के कमांडर के आत्मसमर्पण से संगठन की स्थानीय गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। साथ ही अन्य माओवादी सदस्यों के सामने भी मुख्यधारा में लौटने का रास्ता खुल सकता है।

माओवादी नेटवर्क को झटका

सालूका कायम के सरेंडर को माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। जोनल स्तर का कमांडर संगठन में रणनीतिक और संचालन संबंधी जिम्मेदारियों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में उसके आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों और आंतरिक ढांचे पर असर पड़ने की संभावना है।

सुरक्षा एजेंसियां आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से विस्तृत पूछताछ कर सकती हैं। इससे क्षेत्र में संगठन के बचे हुए नेटवर्क, संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

सरकार की पुनर्वास नीति भी अहम

माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों के अभियान के साथ-साथ आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यधारा में लौटने वाले उग्रवादियों को सरकार की ओर से पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सालूका कायम, पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा के आत्मसमर्पण से यह संदेश भी जा सकता है कि संगठन छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का विकल्प मौजूद है।

सारंडा के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम

सारंडा क्षेत्र अपने घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। यहां माओवादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई अभियान चलाए हैं।

चाईबासा पुलिस के सामने तीन माओवादियों का आत्मसमर्पण इस अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। विशेष रूप से 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर का सरेंडर पुलिस की रणनीति के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है।

पुलिस को मिल सकती है अहम जानकारी

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को संगठन के बारे में कई अहम जानकारियां मिलने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि इलाके में संगठन की मौजूदा स्थिति क्या है, उसके कितने सदस्य सक्रिय हैं और किन क्षेत्रों में उसकी गतिविधियां चल रही हैं।

इसके अलावा पुलिस माओवादी संगठन के हथियारों, संचार व्यवस्था, आपूर्ति नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर सकती है।

अन्य माओवादियों पर बढ़ेगा दबाव

सालूका कायम जैसे वरिष्ठ कमांडर के आत्मसमर्पण से संगठन के अन्य सदस्यों पर भी दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षा एजेंसियां उम्मीद कर सकती हैं कि आने वाले समय में अन्य सक्रिय माओवादी भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करेंगे।

एंटी नक्सल अभियान में केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों का भरोसा जीतना और उग्रवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

चाईबासा में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि

चाईबासा पुलिस के सामने शुक्रवार को हुआ यह आत्मसमर्पण झारखंड के एंटी नक्सल अभियान के लिए अहम माना जा रहा है। 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालूका कायम के साथ उसकी पत्नी पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा का सरेंडर माओवादी संगठन की गतिविधियों को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस और सुरक्षाबल अब इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में अपनी रणनीति को और मजबूत कर सकते हैं। आत्मसमर्पण करने वालों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जंगलों में बचे माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अभियान तेज किया जा सकता है।

फिलहाल तीनों के आत्मसमर्पण को चाईबासा और सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस आत्मसमर्पण के बाद क्षेत्र में सक्रिय अन्य माओवादी सदस्यों पर इसका कितना असर पड़ता है और क्या वे भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हैं।

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