झारखंड

जंगलों में कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क, नौ इनामी अब भी फरार

nidhi
25 Oct 2026 10:37 AM IST
जंगलों में कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क, नौ इनामी अब भी फरार
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कई माओवादियों ने छोड़े हथियार, नौ वांछित उग्रवादियों की तलाश में पुलिस
रांची: झारखंड में उग्रवादी संगठनों के खिलाफ जारी अभियानों के बीच नौ इनामी वांछित उग्रवादियों की तलाश जारी है। इनमें भाकपा माओवादी के अलावा टीएसपीसी और पीएलएफआई से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं। कुछ के दूसरे राज्यों में चले जाने की सूचनाएं मिली हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है। इस बीच झारखंड में सक्रिय रहे कई माओवादियों ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया है। कुछ अन्य गिरफ्तार भी हुए हैं।
हालिया घटनाक्रम में माओवादी दंपती मंगल और मालती ने कोलकाता में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। दोनों झारखंड के सारंडा क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। पुलिस के अनुसार, वहां संगठन की गतिविधियां चलाना लगातार कठिन होता जा रहा था। इस घटनाक्रम को झारखंड और उसके पड़ोसी राज्यों में माओवादी संगठन की स्थिति में आए बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
नौ वांछितों पर अलग-अलग इनाम
फरार उग्रवादियों में नितेश यादव उर्फ इरफान पर 15 लाख रुपये का इनाम है। आरिफ उर्फ शशिकांत, मनोहर गंझू और गोदराय यादव पर दस-दस लाख रुपये घोषित हैं। पंकज कोरवा तथा राजू भुइया पांच-पांच लाख रुपये के इनामी हैं। इनके अलावा बलराम लोहरा पर दो लाख, सामुएल बुढ़ और सुदेश गंझू पर एक-एक लाख रुपये का इनाम है। आरिफ और सुदेश का संबंध टीएसपीसी, जबकि बलराम तथा सामुएल का संबंध पीएलएफआई से बताया गया है। इस सूची में अलग-अलग संगठनों के सदस्य होने के कारण सभी को एक ही माओवादी दस्ते का हिस्सा मानना सही नहीं होगा। इनकी तलाश से जुड़ी खबर में संगठन, पद और घोषित इनाम के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। इसी तरह किसी के दूसरे राज्य में पहुंचने की सूचना और वहां उसकी मौजूदगी की पुष्टि भी अलग बातें हैं। फिलहाल बाहर भागने से जुड़ी सूचनाओं का सत्यापन जारी है।
कोलकाता में दंपती ने सौंपे हथियार
मंगल और मालती ने शुक्रवार को कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद के सामने आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के अनुसार, मंगल पहले डालमा क्षेत्र में सक्रिय था और बाद में सारंडा चला गया। मालती भी उसके साथ वहां पहुंची थी। मंगल ने सशस्त्र संघर्ष का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। पुलिस ने बताया कि सारंडा में पश्चिम बंगाल के कई माओवादी सक्रिय थे, जिनमें से कुछ गिरफ्तार हो चुके हैं। इस आत्मसमर्पण से यह भी स्पष्ट होता है कि झारखंड में सक्रिय रहे सदस्यों से जुड़े घटनाक्रम केवल राज्य की सीमा तक सीमित नहीं हैं। पड़ोसी राज्यों में गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण होने पर वहां सामने आई जानकारी झारखंड से जुड़े मामलों को समझने में प्रासंगिक हो सकती है। हालांकि, किसी आत्मसमर्पित सदस्य से कौन-सी जानकारी मिली है, इस बारे में आधिकारिक विवरण के बिना दावा करना उचित नहीं होगा।
जुलाई में भी 16 सदस्यों ने छोड़े थे हथियार
इससे पहले 28 जुलाई 2026 को झारखंड पुलिस मुख्यालय में 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें 11 पुरुष और पांच महिलाएं शामिल थीं। इस समूह के 14 सदस्य कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में मिसिर बेसरा तथा असीम मंडल के दस्तों से जुड़े बताए गए थे। दो अन्य लातेहार में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वालों ने 11 हथियार और 1,562 गोलियां सौंपी थीं। उस समय अधिकारियों ने लगातार अभियानों, संगठन के अंदर शोषण से असंतोष और राज्य की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को हथियार छोड़ने की वजहों में गिनाया था। उसी रिपोर्ट में मिसिर बेसरा दस्ते के आठ सदस्यों के छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण का भी उल्लेख था। हालांकि, जुलाई के आंकड़ों को वर्तमान स्थिति का आंकड़ा मानकर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के बीच अंतर जरूरी
उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और फरारी तीन अलग स्थितियां हैं। हथियार छोड़ने वाले व्यक्ति के मामले को गिरफ्तार किए गए आरोपी के मामले के साथ मिलाने से तस्वीर अस्पष्ट हो सकती है। इसी तरह किसी संगठन के कमजोर पड़ने का अर्थ यह नहीं है कि उससे संबंधित सभी वांछित सदस्य पकड़े जा चुके हैं। मौजूदा घटनाक्रम से संगठन के सामने दबाव और सदस्यों के बिखराव के संकेत मिलते हैं। यह उपलब्ध घटनाओं पर आधारित आकलन है; पूरे राज्य में उग्रवाद समाप्त होने का निष्कर्ष इससे अपने आप नहीं निकलता। फरार सदस्यों की तलाश, लंबित मामलों की पड़ताल और आत्मसमर्पण करने वालों से जुड़ी प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण बनी रहती है।
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