झारखंड

मंटू गंझू की जेल में मौत, हत्या का आरोप

Kavita2
17 Aug 2026 12:04 PM IST
मंटू गंझू की जेल में मौत, हत्या का आरोप
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पलामू। झारखंड के पलामू जिले के स्थानीय मंडल कारा में टीएसपीसी उग्रवादी मंटू गंझू उर्फ दिलेश सिंह की मौत के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आर्म्स एक्ट के मामले में करीब दो वर्षों से जेल में बंद मंटू की मौत ने जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। जेल प्रशासन इसे आत्महत्या का मामला बता रहा है, जबकि मृतक के परिजनों ने इसे साजिश के तहत की गई हत्या करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार, मंटू गंझू पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला था। वह आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले में मंडल कारा में बंद था। जेल प्रशासन के मुताबिक, मंटू ने जेल परिसर में फांसी लगाने का प्रयास किया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने जांच के बाद मंटू को मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। जेल प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जानकारी के आधार पर यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है।

हालांकि, मंटू गंझू के परिवार ने जेल प्रशासन के इस दावे को मानने से इनकार कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि मंटू की हत्या की गई है और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिजनों का कहना है कि जेल जैसी सुरक्षित जगह में किसी बंदी का इस तरह फांसी लगाने की स्थिति तक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने जेल में बंदियों की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

मंटू गंझू की मौत के बाद जेल प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जेल के अंदर ऐसी घटना कैसे हुई। जेलों में बंदियों की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था होती है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और नियमित जांच जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद इस तरह की घटना होना गंभीर विषय माना जा रहा है।

मामले की जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटना के समय मंटू कहां था, वहां कौन-कौन मौजूद थे और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था। इसके अलावा जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

मंटू गंझू का नाम टीएसपीसी यानी तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी से जुड़ा बताया जाता है। टीएसपीसी झारखंड में सक्रिय एक उग्रवादी संगठन के रूप में जाना जाता है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस संगठन से जुड़े मामलों की जांच करती रही हैं।

आर्म्स एक्ट के मामले में जेल में बंद मंटू की मौत के बाद अब पुलिस और प्रशासन के लिए घटना की वास्तविक वजह सामने लाना जरूरी हो गया है। यदि यह आत्महत्या का मामला है तो जेल में सुरक्षा चूक के कारणों की जांच करनी होगी, वहीं अगर परिजनों के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो मामला और गंभीर हो सकता है।

जेल प्रशासन ने घटना के बाद आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियमानुसार ऐसे मामलों में न्यायिक जांच या मजिस्ट्रियल जांच भी कराई जा सकती है, ताकि मौत के कारणों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो सके।

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जेल में बंद एक कैदी की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह पूरी जेल व्यवस्था की जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़ा मामला है।

बंदी चाहे किसी भी अपराध में जेल में हो, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जेल प्रशासन की होती है। ऐसे में किसी बंदी की मौत होने पर यह जांच जरूरी हो जाती है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर कोई लापरवाही हुई या घटना के पीछे कोई अन्य कारण था।

मृतक के परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि मंटू की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

दूसरी ओर जेल प्रशासन अपने स्तर पर घटना की जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे मौत के वास्तविक कारण और शरीर पर मौजूद चोटों से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है। इसके अलावा घटना स्थल की जांच और संबंधित लोगों के बयान भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

मंटू गंझू की मौत ने एक बार फिर जेलों में सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अब केवल एक कैदी की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जेल प्रबंधन की जिम्मेदारी और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना है। जेल प्रशासन के दावे और परिजनों के आरोपों के बीच अब जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि मंटू गंझू की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और कारण छिपा हुआ था।

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