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झारखंड में राशन वितरण में बड़ी लापरवाही

Kavita2
18 Oct 2026 2:03 PM IST
झारखंड में राशन वितरण में बड़ी लापरवाही
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पलामू। झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अक्टूबर 2026 के लिए आवंटित खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी में गंभीर लापरवाही सामने आई है। राज्य सरकार की सख्ती और खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जिलों में जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों तक समय पर अनाज नहीं पहुंच सका है। पलामू जिले में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है। विभाग ने पहले 15 अक्टूबर तक खाद्यान्न की आपूर्ति पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि में कार्य पूरा नहीं होने के कारण छह जिलों को विशेष परिस्थितियों में तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बावजूद 18 अक्टूबर तक पलामू में डोर स्टेप डिलीवरी अधूरी रहने की जानकारी सामने आई है। इससे राशन वितरण प्रभावित होने और गरीब परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत भी पड़ी कम

खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने अक्टूबर महीने के खाद्यान्न की आपूर्ति निर्धारित समय पर पूरी करने के निर्देश दिए थे।

इसके तहत संबंधित अधिकारियों को 15 अक्टूबर तक पीडीएस दुकानदारों के पास खाद्यान्न पहुंचाना था।

लेकिन कई जिलों में डोर स्टेप डिलीवरी का काम अधूरा रह गया।

इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने विशेष परिस्थिति में आपूर्ति पूरी करने के लिए तीन दिन का समय बढ़ाया।

नई समय-सीमा 18 अक्टूबर निर्धारित की गई। इसके बावजूद पलामू जिले में सभी संबंधित दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य पूरा नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

इससे आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

पलामू समेत छह जिलों को जारी हुआ था निर्देश

विभाग के उप सचिव राम कृष्ण कुमार ने 15 अक्टूबर को संबंधित जिलों के अधिकारियों के नाम पत्र जारी किया था।

इस पत्र में पलामू, चतरा, देवघर, गिरिडीह, गोड्डा और पूर्वी सिंहभूम जिले के जिला आपूर्ति पदाधिकारी-सह-जिला प्रबंधक को विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त समय देने की जानकारी दी गई थी।

इन जिलों को 18 अक्टूबर तक डोर स्टेप डिलीवरी पूरी कराने का निर्देश दिया गया।

विभाग का उद्देश्य था कि अतिरिक्त समय मिलने के बाद निर्धारित खाद्यान्न बिना किसी देरी के राशन दुकानदारों तक पहुंच जाए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पलामू में इस समय-सीमा तक भी आपूर्ति का काम पूरा नहीं हो पाया।

अन्य पांच जिलों में 18 अक्टूबर तक कितनी आपूर्ति पूरी हुई, इसका ताजा जिलावार विवरण उपलब्ध नहीं है।

लापरवाही सामने आने पर अधिकारियों को फटकार

अक्टूबर महीने के खाद्यान्न की आपूर्ति में देरी को लेकर विभाग पहले ही नाराजगी जाहिर कर चुका है।

समय पर डोर स्टेप डिलीवरी नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी।

विभाग ने स्पष्ट किया था कि खाद्यान्न की आपूर्ति में अनावश्यक देरी से राशन वितरण की व्यवस्था प्रभावित होती है।

इसलिए अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर आपूर्ति पूरी कराने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

इसके बावजूद निर्धारित अवधि और अतिरिक्त मोहलत में भी काम अधूरा रहने से प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल किसी अधिकारी के खिलाफ निलंबन, जुर्माने या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था क्यों है जरूरी?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।

इस खाद्यान्न को जनवितरण प्रणाली की दुकानों तक पहुंचाने के लिए परिवहन और आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है।

डोर स्टेप डिलीवरी का उद्देश्य गोदामों से राशन दुकानों तक खाद्यान्न की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

इससे राशन दुकानदारों को अलग से परिवहन की व्यवस्था करने की आवश्यकता कम होती है।

साथ ही खाद्यान्न के उठाव, परिवहन और दुकानों तक पहुंचने की प्रक्रिया की निगरानी की जा सकती है।

यदि दुकानों तक अनाज समय पर नहीं पहुंचता, तो निर्धारित वितरण कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका रहती है।

राशन कार्डधारकों को हो सकती है परेशानी

पलामू जिले में खाद्यान्न की डिलीवरी अधूरी रहने से राशन कार्डधारकों को परेशानी होने की आशंका है।

जनवितरण प्रणाली पर निर्भर कई परिवार अपनी दैनिक खाद्यान्न संबंधी जरूरतों के लिए सरकारी राशन प्राप्त करते हैं।

यदि संबंधित दुकान पर समय से अनाज उपलब्ध नहीं होता, तो लाभार्थियों को दोबारा दुकान जाना पड़ सकता है।

विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।

हालांकि, जिले में कितने लाभार्थी अक्टूबर महीने का राशन प्राप्त नहीं कर पाए हैं, इसका सत्यापित आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।

इसलिए आपूर्ति में देरी और वास्तविक वितरण प्रभावित होने की स्थिति का अलग-अलग आकलन जरूरी है।

परिवहन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी चुनौती

झारखंड में खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ महीनों से परिवहन संबंधी समस्याएं सामने आती रही हैं।

जुलाई 2026 में खाद्य विभाग ने राशन की सीधी डोर स्टेप डिलीवरी को लेकर नई व्यवस्था से संबंधित आदेश जारी किया था।

इसके तहत केंद्र सरकार के गोदाम से खाद्यान्न उठाकर सीधे पीडीएस दुकानों तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी।

हालांकि, कुछ जिलों में नई परिवहन व्यवस्था लागू करने और ठेकेदारों की नियुक्ति संबंधी समस्याएं सामने आई थीं।

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यह स्पष्ट नहीं है कि पलामू में अक्टूबर की देरी सीधे तौर पर इसी परिवहन व्यवस्था के कारण हुई है या इसके पीछे अन्य प्रशासनिक कारण हैं।

ऑनलाइन प्रणाली से होती है राशन वितरण की निगरानी

झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी के लिए आधार आधारित पीडीएस पोर्टल का उपयोग किया जाता है।

राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर राशन दुकानों की गतिविधियों, खाद्यान्न आवंटन, स्टॉक और वितरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

पोर्टल के 15 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 के लिए राज्य में 60.54 लाख से अधिक राशन कार्ड दर्ज थे।

उस समय लगभग 25.54 लाख राशन कार्डधारकों द्वारा राशन प्राप्त किए जाने की जानकारी दर्ज थी।

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के लिए राज्य में राशन वितरण की प्रक्रिया जारी थी।

हालांकि, राज्यव्यापी वितरण के आंकड़ों से पलामू में लंबित डोर स्टेप डिलीवरी की वास्तविक मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती।

जिला आपूर्ति अधिकारियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में जिला आपूर्ति अधिकारी और संबंधित प्रबंधकीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इन्हें आवंटित खाद्यान्न के उठाव, परिवहन और पीडीएस दुकानों तक समय पर पहुंचने की निगरानी करनी होती है।

यदि किसी चरण में परेशानी आती है, तो संबंधित अधिकारियों को उसका समाधान करते हुए आपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।

विभाग ने छह जिलों के अधिकारियों को अतिरिक्त समय देकर आपूर्ति पूरी कराने का अवसर दिया था।

अब पलामू में काम अधूरा रहने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि खाद्यान्न की आपूर्ति में बाधा कहां आ रही है।

दुकानों पर अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी

खाद्यान्न वितरण के लिए केवल गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होना पर्याप्त नहीं है।

आवश्यक है कि आवंटित अनाज निर्धारित राशन दुकानों तक भी समय पर पहुंचाया जाए।

इसके बाद ही लाभार्थियों को वितरण प्रक्रिया का पूरा लाभ मिल सकता है।

ग्रामीण इलाकों में समय से अनाज पहुंचाने के लिए परिवहन वाहनों, गोदामों और संबंधित कर्मचारियों के बीच समन्वय जरूरी है।

आपूर्ति में देरी होने की स्थिति में लाभार्थियों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है, ताकि उन्हें राशन लेने के लिए बार-बार दुकान न जाना पड़े।

अब विभागीय कार्रवाई और आपूर्ति पूरी होने पर नजर

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अक्टूबर महीने के लिए आवंटित खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी में हुई देरी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पलामू सहित छह जिलों को विशेष परिस्थितियों में 18 अक्टूबर तक अतिरिक्त समय दिया गया था।

इसके बावजूद पलामू में आपूर्ति पूरी नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित खाद्यान्न को जल्द पीडीएस दुकानों तक पहुंचाना और देरी के वास्तविक कारणों का पता लगाना है।

साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।

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