झारखंड

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला JPSC पीटी रद्द CGL पर नहीं मानी मांग

Ratna Netam
9 Aug 2026 7:20 PM IST
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला JPSC पीटी रद्द CGL पर नहीं मानी मांग
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रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पिछले 16 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई। इस वार्ता में सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति जताई। बैठक के बाद सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। वहीं, विवादित वेंडर एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित पूर्व परीक्षाओं में कथित वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने पर भी सरकार सहमत हुई है।
सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे छात्रों की बड़ी मांगों पर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छात्रों की ओर से लगातार आरोप लगाया जा रहा था कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि, छात्रों की एक प्रमुख मांग अभी पूरी नहीं हुई है। आंदोलनकारियों ने JSSC CGL परीक्षा को भी रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
बैठक के दौरान सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में सामने आए विवाद और अनियमितताओं के आरोपों की न्यायिक जांच कराने का निर्णय भी लिया। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भविष्य में इस तरह की शिकायतों को रोकने के लिए व्यापक सुधार किए जाएंगे। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य में पारदर्शी और धांधली मुक्त भर्ती परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए नीतिगत स्तर पर कई बदलाव किए जाएंगे।
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय सुधार समिति गठित करने की बात भी कही है। इस समिति में भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रांची और जेवियर समाज सेवा संस्थान (XLRI) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान दिए जाने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मौजूद खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना है।
वार्ता के दौरान अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से भी सरकार की ओर से बातचीत की गई। हाई लेवल कमेटी में शामिल मंत्रियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे संपर्क किया और भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। मंत्रियों ने उन्हें सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर की जा रही कार्रवाई और लिए गए फैसलों की जानकारी दी। हालांकि, देवेंद्र नाथ महतो ने फिलहाल अपना अनशन समाप्त करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी प्रमुख मांगों पर पूरी तरह सहमति बनने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारी छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा कुछ मांगें मान लिए जाने के बावजूद उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। छात्रों की ओर से 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी महत्वपूर्ण है और जब तक इस पर सरकार स्पष्ट फैसला नहीं लेती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
इस बीच सरकार की ओर से 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और विवादित वेंडर एजेंसी से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों की ED जांच कराने की सहमति को अहम माना जा रहा है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। वहीं सरकार ने भी संकेत दिया है कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
पिछले कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन के कारण राजधानी रांची में छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हैं। विधानसभा घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। अब सभी की नजर 10 अगस्त को होने वाले छात्र प्रदर्शन और सरकार के अगले कदम पर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि न्यायिक जांच और ED जांच के जरिए सामने आने वाले तथ्यों से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या निकलकर सामने आती है।
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