झारखंड

JAS अफसर राधेश्याम मामले में बड़ा फैसला

Saba Naaz
4 July 2026 5:59 PM IST
JAS अफसर राधेश्याम मामले में बड़ा फैसला
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झारखंड: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) अधिकारी राधेश्याम प्रसाद की सीनियरिटी घटाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि सरकार का यह आदेश कानूनी रूप से गलत है और मूल वरीयता को बहाल किया जाना चाहिए। मामले के अनुसार, राधेश्याम प्रसाद का कैडर ट्रांसफर वर्ष 2006 में बिहार से झारखंड किया गया था। उस समय दोनों राज्यों के बीच सहमति से हुए ट्रांसफर में सीनियरिटी खोने की कोई शर्त नहीं थी। इसके बावजूद वर्ष 2008 में झारखंड सरकार ने एक नीति बनाई, जिसमें कहा गया कि आपसी तबादले पर आने वाले कर्मचारियों को उनके बैच में सबसे नीचे रखा जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस नीति को 2006 के पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी सेवा शर्त में ऐसा बदलाव जो कर्मचारी के लिए नुकसानदायक हो, उसे केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना लागू नहीं किया जा सकता, जैसा कि बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 में प्रावधान है। कोर्ट ने सरकार द्वारा 23 सितंबर 2024 को जारी आदेश और 16 दिसंबर 2024 की अंतिम वरीयता सूची को भी रद्द कर दिया। इन आदेशों के तहत राधेश्याम प्रसाद की सीनियरिटी घटाकर 835-बी से 877-डी कर दी गई थी।

अदालत ने निर्देश दिया कि राधेश्याम प्रसाद की मूल सीनियरिटी 835-बी को बहाल किया जाए और उन्हें सभी परिणामी लाभ भी दिए जाएं। मामले की शुरुआत 2006 के कैडर ट्रांसफर से हुई थी, जब राधेश्याम प्रसाद और एक अन्य कर्मचारी ने आपसी सहमति से बिहार और झारखंड कैडर का आदान-प्रदान किया था। इसके बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला और बिना किसी सीनियरिटी शर्त के सेवा में रखा गया। समय के साथ उन्हें 2011, 2016 और 2023 में संयुक्त सचिव पद पर पदोन्नति भी मिली।

लेकिन 2024 में सरकार ने पुराने नियम का हवाला देकर उनका रैंक घटा दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने सुनवाई के बाद इसे गलत मानते हुए सरकार का आदेश रद्द कर दिया। यह फैसला प्रशासनिक सेवा नियमों और कैडर ट्रांसफर से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

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