झारखंड

गांजा तस्करी का बड़ा नेटवर्क, दो महीने में 889 किलो बरामद

nidhi
24 Sept 2026 9:39 AM IST
गांजा तस्करी का बड़ा नेटवर्क, दो महीने में 889 किलो बरामद
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गांजा नेटवर्क का खुलासा पलामू बना बड़ा ठिकाना

पलामू: झारखंड का पलामू जिला गांजा तस्करी के बड़े ट्रांजिट और कथित डंपिंग प्वाइंट के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। पिछले करीब दो महीनों में अलग-अलग कार्रवाई के दौरान करीब 889 किलो गांजा बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। जांच में तस्करी के तार ओडिशा से लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश तक जुड़े होने की बात सामने आ रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है।

पलामू की भौगोलिक स्थिति तस्करों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सड़क मार्ग से यह इलाका बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले कई रास्तों से जुड़ा हुआ है। आशंका है कि ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों से गांजे की खेप झारखंड के रास्ते पलामू लाई जाती है और यहां से इसे अलग-अलग वाहनों के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जाता है।
लगातार बड़ी मात्रा में गांजा पकड़े जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या तस्करों ने पलामू में अस्थायी भंडारण के ठिकाने तैयार कर रखे हैं। पुलिस कार्रवाई में सामने आए मामलों की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खेप कहां से भेजी गई, इसे पलामू में किसके पास पहुंचाया जाना था और इसके बाद किन शहरों या राज्यों में भेजने की तैयारी थी।
तस्कर पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। मादक पदार्थों को सामान्य सामान के बीच छिपाकर ले जाने से लेकर छोटे वाहनों में खेप बांटकर भेजने तक के तरीके सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में वाहन चालक या खेप के साथ पकड़ा गया व्यक्ति अक्सर नेटवर्क की शुरुआती कड़ी होता है। असली सप्लायर और खरीदार तक पहुंचने के लिए मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल लेन-देन और आरोपियों के संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
करीब दो महीने में 889 किलो गांजे की बरामदगी ने इस नेटवर्क के बड़े पैमाने पर सक्रिय होने की आशंका को मजबूत किया है। हालांकि केवल बरामदगी के आधार पर पूरे पलामू को गांजा तस्करी का स्थापित 'डंपिंग प्वाइंट' कहना जांच पूरी होने से पहले जल्दबाजी होगी। पुलिस अलग-अलग मामलों में पकड़े गए आरोपियों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। ओडिशा से गांजा लाकर झारखंड के रास्ते बिहार और उत्तर प्रदेश भेजे जाने की आशंका के कारण अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच भी अहम हो गई है। यदि अलग-अलग मामलों के तार एक ही गिरोह से जुड़ते हैं तो संबंधित राज्यों की पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा सकता है।
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए प्रमुख सड़कों पर वाहनों की जांच, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई बढ़ाई जा रही है। बड़ी मात्रा में गांजा पकड़े जाने के मामलों में NDPS कानून के तहत कार्रवाई की जाती है और सप्लायर से लेकर खरीदार तक पूरी श्रृंखला की पहचान करने का प्रयास किया जाता है।फिलहाल पलामू में लगातार हो रही बरामदगी ने गांजा तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की ओर ध्यान खींचा है। जांच का सबसे अहम लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना है जो पर्दे के पीछे से खेप मंगाने, भंडारण और दूसरे राज्यों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
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